मुंबई और MMR में 15-20 साल में बनेंगे करीब 30 लाख घर, शिंदे ने बताया लक्ष्य
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई और MMR में पुनर्विकास के जरिए करीब 30 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और मुंबई महानगर प्रदेश (MMR) में अगले 15-20 साल में करीब 30 लाख घर बनाने की बड़ी योजना रखी है। इस योजना के बाद पुनर्विकास इलाके की आगे की हाउसिंग पॉलिसी के केंद्र में आ गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में यह लक्ष्य बताया। उन्होंने मुंबई और MMR में क्लस्टर पुनर्विकास को बढ़ाने की योजनाओं का भी जिक्र किया।
यह लक्ष्य ऐसे वक्त में आया है जब मुंबई में रिहायशी घरों की सप्लाई का एक अहम जरिया पुनर्विकास बनता जा रहा है। हाल की JLL-NAREDCO रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से मुंबई में 1,000 से ज्यादा पुनर्विकास प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। शहर की कुल रिहायशी सप्लाई में इनका हिस्सा करीब 13% है। घरों की बिक्री में भी पुनर्विकास का हिस्सा काफी बढ़ा है, जिससे मुंबई के रिहायशी बाजार में इसकी बढ़ती अहमियत दिखती है।
इस बदलाव में पश्चिमी उपनगरों की भूमिका खास है। 2020 से शुरू हुए पुनर्विकास प्रोजेक्ट में से करीब 36% बोरीवली, मालाड, अंधेरी और गोरेगांव में हैं। यानी जिन पुराने रिहायशी इलाकों में जमीन दिन-ब-दिन कम होती जा रही है, वहां पुनर्विकास की हलचल बड़ी तादाद में एक ही जगह सिमटी हुई है।
झोपड़पट्टी पुनर्वसन यानी SRA के क्षेत्र में मौका खास तौर पर बड़ा है। JLL-NAREDCO की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में अभी 1,202 सक्रिय झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्रोजेक्ट हैं। इनमें करीब 2,156 एकड़ जमीन पर 3.2 लाख से ज्यादा झोपड़ियां शामिल हैं। मुंबई जैसे शहर में, जहां बड़े पैमाने पर घर बनाने के लिए खाली जमीन कम है, यह पुनर्विकास की बड़ी संभावना दिखाता है।
लश्करिया ग्रुप के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर अरशद लश्करिया ने कहा, \"मुंबई में हाउसिंग बढ़ाने के लिए मौजूदा शहरी जमीन का असरदार इस्तेमाल करना दिन-ब-दिन जरूरी होता जा रहा है। सही प्लानिंग, पारदर्शिता और रहिवासियों के पुनर्वसन पर ध्यान देकर पुनर्विकास किया जाए, तो नए घर बनाने के साथ मौजूदा शहरी ढांचे की क्वालिटी भी सुधारी जा सकती है। 30 लाख घरों का लक्ष्य पाने के लिए सरकार, डेवलपर, हाउसिंग सोसायटी और स्थानीय समुदाय के बीच तालमेल जरूरी होगा। साथ ही असरदार अमल और प्रोजेक्ट समय पर पूरे करना इस लक्ष्य की कामयाबी के लिए निर्णायक होगा।\"
रिपोर्ट के मुताबिक 30 लाख घरों का लक्ष्य पाने के लिए सिर्फ प्रोजेक्ट मंजूर कर देना काफी नहीं होगा। प्रोजेक्ट पर अमल, फाइनेंस, नियामक मंजूरियां, पुनर्वसन का इंतजाम और साथ की बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही अहम होंगी। खासकर क्लस्टर पुनर्विकास से बिखरे हुए प्लॉट और पुरानी बस्तियों की प्लानिंग बड़े इलाके के स्तर पर करना मुमकिन हो सकता है। इससे ज्यादा एकजुट रिहायशी समुदाय बनने की संभावना है।
एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, \"क्लस्टर पुनर्विकास मुंबई के लिए बड़ा बदलाव लाने वाला कारक हो सकता है, क्योंकि इसमें बुनियादी सुविधाओं, खुली जगहों और रिहायशी विकास की प्लानिंग अलग-अलग प्लॉट की जगह एक साथ की जा सकती है। लेकिन डेवलपरों को जरूरी स्पष्टता और निश्चितता देते हुए मौजूदा रहिवासियों को समय पर पुनर्वसन और पुनर्विकास से लंबे वक्त का फायदा मिले, ऐसा ढांचा बनाना अहम होगा।\"
डेवलपरों के लिए मौजूदा रहिवासियों के हित, आर्थिक रूप से टिकने वाले प्रोजेक्ट और अतिरिक्त घरों की सप्लाई के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी। रहिवासियों के लिए पुनर्विकास की कामयाबी पुनर्वसन की क्वालिटी और समय पर पूरा होने के साथ-साथ नए घरों के साथ मिलने वाली सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की क्वालिटी पर भी निर्भर करेगी।
इसलिए 30 लाख घरों का लक्ष्य MMR के लिए सिर्फ निर्माण की चुनौती नहीं है। यह इसकी भी परीक्षा है कि पुनर्विकास अलग-अलग प्रोजेक्ट तक सीमित न रहकर बड़े पैमाने की, सोची-समझी शहरी कायापलट में बदल पाता है या नहीं। इसमें सिर्फ अतिरिक्त घर ही नहीं, बल्कि ज्यादा सुरक्षित इमारतें, बेहतर सुविधाएं और अच्छी तरह जुड़े रिहायशी इलाके बनने की उम्मीद है।