मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:03 IST

मिरज में 13 घंटे का इंतजार, होटल भी जल्दी खाली, फिर भी नागपुर के दो खिलाड़ियों ने जीता स्वर्ण

गोवा की 37वीं वेस्ट जोन चैम्पियनशिप में संचिता मालेवार और मनोज चव्हाण ने सोना जीता, पर सफर और ठहरने की सुविधाओं पर सवाल उठे हैं।

मिरज में 13 घंटे का इंतजार, होटल भी जल्दी खाली, फिर भी नागपुर के दो खिलाड़ियों ने जीता स्वर्ण
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गोवा में 27 से 29 सितंबर तक हुई 37वीं वेस्ट जोन चैम्पियनशिप में नागपुर के दो खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीता। लेकिन जीत के साथ ही खिलाड़ियों को मिली सुविधाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नागपुर जिले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने के दावे के साथ 'विभागीय मिशन लक्ष्यवेध' योजना चल रही है, और खिलाड़ियों को सीमित बजट और लंबे सफर के बीच मैदान में उतरना पड़ा।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली हाई जंप की खिलाड़ी संचिता मालेवार और भाला फेंक के खिलाड़ी मनोज चव्हाण का चयन वेस्ट जोन चैम्पियनशिप के लिए हुआ था। विभागीय उपसंचालक महादेव कासगावड़े ने दोनों खिलाड़ियों और कोच के लिए थर्ड एसी में सफर की व्यवस्था की। टिकट नागपुर से मिरज (1178 किमी) और फिर मिरज से मडगांव (306 किमी) तक के थे। मिरज नागपुर से करीब 1,100 किमी दूर है।

25 सितंबर को मिरज पहुंचने के बाद खिलाड़ियों और कोच को अगली ट्रेन के लिए सुबह 9.30 बजे से रात 10.45 बजे तक स्टेशन पर रुकना पड़ा। करीब 13 घंटे का यह इंतजार सफर को और थकाऊ बना गया।

सबसे बड़ा सवाल संचिता के इवेंट को लेकर उठा। हाई जंप का इवेंट आखिरी दिन शाम 4 बजे था, लेकिन टीम को सुबह करीब 11 बजे ही होटल खाली करना पड़ा। सुबह संचिता ने उपसंचालक को कॉल करके कहा कि उन्हें होटल में रहने दिया जाए। इस पर अफसर ने सख्त लहजे में कहा कि अपने स्तर पर मैनेज कीजिए, बाद में देख लेंगे। चेकआउट के बाद खिलाड़ी और कोच सामान लेकर स्टेडियम पहुंचे और दिन वहीं बिताया। शाम को संचिता ने 1.45 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता।

इससे एक दिन पहले मनोज चव्हाण ने 63.06 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। यानी सुविधाओं और आराम की कमी के बावजूद दोनों ने अपनी क्षमता साबित की। खिलाड़ियों ने सफलता का श्रेय कोच इशिता रॉय के मार्गदर्शन को दिया। मामले पर उपसंचालक ने कहा कि हमने हवाई सफर का प्रयास किया था। अगर खर्च ज्यादा हुआ है तो उन्हें बाकी राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

उपकरणों का हाल भी अच्छा नहीं था। कुछ समय पहले तक मिशन लक्ष्यवेध के खिलाड़ियों को उपकरण नहीं दिए गए थे। मनोज फटे स्पाइक से और संचिता बिना स्पाइक के तैयारी कर रही थीं। डेरवण में हुई स्टेट चैम्पियनशिप के बाद विभाग हरकत में आया और वेस्ट जोन चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के लिए जरूरी स्पाइक उपलब्ध कराए गए।

खर्च का हिसाब भी उलझा हुआ है। दो खिलाड़ियों और एक कोच के लिए विभाग की ओर से करीब 25,000 रुपए स्वीकृत किए गए थे। इसी राशि में होटल, भोजन, नाश्ता और स्टेडियम तक आने-जाने सहित बाकी खर्च शामिल था। टीम के मुताबिक खर्च कम से कम रखने के बावजूद करीब 33 से 35 हजार रुपए लग गए। अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी या नहीं, यह साफ नहीं है।

एथलेटिक्स के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और जिला संघ के सचिव डॉ. शरद सूर्यवंशी के मुताबिक मिशन लक्ष्यवेध के खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था पूरी तरह एथलीट केंद्रित होनी चाहिए। उनका कहना है कि लंबी दूरी के सफर में जरूरत के हिसाब से ट्रेन की जगह विमान की सुविधा दी जा सकती है, ताकि खिलाड़ियों का समय और ऊर्जा बचे।

सूर्यवंशी ने कहा कि प्रतियोगिता से पहले पर्याप्त आराम, एसी कमरे, पौष्टिक भोजन और आसान ट्रांसपोर्ट जरूरी है। इवेंट से कई घंटे पहले खिलाड़ियों को स्टेडियम में बैठाने के बजाय उन्हें कमरे में आराम और मानसिक तैयारी का मौका मिलना चाहिए। प्रतियोगिता के बाद रिकवरी के लिए भी पर्याप्त आराम, गर्म पानी और बार्क से उपचार जैसी सुविधाएं चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार मिशन लक्ष्यवेध में भविष्य के ऊंचे स्तर के और संभावित ओलंपिक खिलाड़ी तैयार कर रही है, इसलिए उन्हें सामान्य व्यवस्था नहीं, बल्कि भविष्य के चैम्पियन के हिसाब से सुविधाएं और माहौल मिलना चाहिए।

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