मीरा-भाईंदर परिवहन कर्मचारियों की आज हड़ताल, वेतनवाढ को लेकर संघटन अड़े
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की बस सेवा के कर्मचारी वेतनवाढ की मांग पर आज काम बंद आंदोलन पर उतरे, प्रशासन ने आंदोलन वापस लेने की अपील की।
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की परिवहन सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों ने आज, सोमवार २८ सितंबर को काम बंद आंदोलन का ऐलान किया है। वेतनवाढ के साथ-साथ कुछ और मांगों को लेकर यह आंदोलन बुलाया गया है। इस हड़ताल के चलते शहर की बस सेवा पर क्या असर पड़ेगा, इस पर यात्रियों की नजर टिकी हुई है।
आंदोलन का ऐलान होने के बाद पिछले हफ्ते पालिका प्रशासन और कर्मचारी संघटनों के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई थी। लेकिन इस बैठक में मांगों पर कोई ठोस हल नहीं निकल पाया, जिसके बाद कर्मचारी संघटन आंदोलन पर अड़े रहने की बात साफ कर दी। यही वजह है कि आज शहर में बस सेवा चलेगी या ठप रहेगी, यह अभी तय नहीं है।
मीरा-भाईंदर महापालिका की परिवहन सेवा शहर के भीतर के साथ-साथ ठाणे और मुंबई की तरफ जाने वाले रूटों पर भी बसें चलाती है। इस सेवा में करीब ३०० कंत्राटी कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें ज्यादातर ड्राइवर और कंडक्टर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों को फिलहाल करीब २३ हजार रुपये वेतन मिलता है। कर्मचारी संघटनों का दावा है कि पिछले ११ साल से इस वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
महंगाई बढ़ने और काम का बोझ देखते हुए कर्मचारी संघटनों ने हर साल १० फीसदी वेतनवाढ की मांग रखी है। इसके अलावा प्रवास भत्ता बढ़ाने और बाकी लंबित मांगों पर भी फैसला लेने की मांग की गई है। संघटनों का कहना है कि वे सालों से इन मांगों को लेकर प्रशासन के पास पाठपुरावा करते रहे हैं, लेकिन जब उम्मीद के मुताबिक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आखिरकार काम बंद आंदोलन का फैसला लिया गया।
आंदोलन का ऐलान होने के बाद पालिका प्रशासन ने परिवहन कर्मचारी संघटनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में प्रशासन ने साफ किया कि कर्मचारियों को मूल वेतन के साथ अलग-अलग भत्ते दिए जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक सरकार की तरफ से लागू बढ़े हुए दर के हिसाब से हर छह महीने में स्पेशल भत्ता भी दिया जाता है। साप्ताहिक छुट्टी का वेतन भी मूल वेतन में ही शामिल किया जाता है, यह प्रशासन ने स्पष्ट किया। प्रशासन का यह भी कहना है कि सरकार ने मूल वेतन में बढ़ोतरी नहीं की है, इसलिए पालिका ने भी अपनी तरफ से अलग से मूल वेतन नहीं बढ़ाया। इसी आधार पर प्रशासन ने कर्मचारी संघटनों से प्रस्तावित आंदोलन वापस लेने की अपील की है।
आंदोलन की वजह से बस सेवा ठप होने और यात्रियों को परेशानी होने की संभावना को देखते हुए पालिका प्रशासन ने पुलिस को पत्र लिखकर हालात संभालने में जरूरी मदद करने की गुजारिश की है। साथ ही कर्मचारियों को कंत्राटदार के जरिए आंदोलन को लेकर नोटिस भी भेजी गई है, जिसमें आंदोलन करने पर नियम के मुताबिक सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बहरहाल, प्रशासन के साथ बैठक होने के बावजूद मांगों पर संतोषजनक हल नहीं निकलने की वजह से कर्मचारी संघटन आंदोलन पर अड़े हुए हैं। इसलिए आज असल में कितने कर्मचारी काम पर हाजिर होते हैं और परिवहन सेवा कितनी चलती है, इसी पर शहर की ट्रैफिक की तस्वीर टिकी है। आंदोलन हुआ तो रोजाना बस सेवा पर निर्भर रहने वाले हजारों यात्रियों को दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। पहले भी परिवहन कर्मचारियों के आंदोलन से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी है, इस बार भी प्रशासन और कर्मचारी संघटनों के बीच इस टकराव का सीधा असर यात्रियों पर पड़ने की संभावना बनी हुई है।