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01:23 IST

मेक्सिको के रेगिस्तान में 160 साल बाद बायसन की वापसी, हरियाली लौटी

मेक्सिको के कोआहुइला इलाके में करीब 160 साल पहले शिकार और आवास खत्म होने से लुप्त हो चुके अमेरिकन बायसन को फिर बसाया गया, इससे रेगिस्तान की मिट्टी और वनस्पति में सुधार दिखने लगा है।

मेक्सिको के रेगिस्तान में 160 साल बाद बायसन की वापसी, हरियाली लौटी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

प्रकृति के पास अपने जख्म खुद भरने की गजब की ताकत होती है, बस सही मदद मिलनी चाहिए। मेक्सिको के रेगिस्तान में इसी तरह का एक नजारा दिख रहा है। करीब 160 से 200 साल पहले इंसानी शिकार और प्राकृतिक ठिकाने खत्म होने की वजह से लुप्त हो चुका विशाल जानवर अमेरिकन बायसन, मेक्सिको के कोआहुइला इलाके में फिर से बसाया गया है। इस जानवर की मौजूदगी और उसकी रोजमर्रा की जीवनशैली की वजह से सूखे और बंजर रेगिस्तान में फिर से हरियाली उगनी शुरू हो गई है।

अमेरिकन बायसन को उत्तर अमेरिका महाद्वीप का सबसे बड़ा जमीन पर रहने वाला स्तनधारी जानवर माना जाता है। कभी कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के बड़े मैदानी इलाकों में इन जानवरों के हजारों झुंड बेरोकटोक घूमते थे। इकोलॉजी की भाषा में बायसन को साधारण जानवर नहीं बल्कि इकोसिस्टम इंजीनियर का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि इनकी जीवनशैली पूरे इकोसिस्टम की सेहत बनाए रखने में मददगार साबित होती है। 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में हुए बेतहाशा शिकार की वजह से ये जानवर मेक्सिको के इलाके से पूरी तरह गायब हो गए थे।

इस पुरानी गलती को सुधारने के लिए फंडासिओन प्रो क्वात्रो सिएनेगास (Fundación Pro Cuatro Ciénegas) नाम की संस्था ने एक खास मुहिम शुरू की। यूनेस्को से मान्यता प्राप्त क्वाट्रोसिएनेगास नेचर रिजर्व अपनी सफेद जिप्सम पहाड़ियों और दुर्लभ नीले पानी की झीलों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यह रिजर्व सैकड़ों पेड़-पौधों और दुर्लभ जानवरों का घर है। इस इलाके का बिगड़ा हुआ पर्यावरण संतुलन ठीक करने के लिए फाउंडेशन ने बायसन को फिर से बसाने का फैसला लिया।

इस मुहिम के तहत नेचर रिजर्व में कुल 47 अमेरिकन बायसन छोड़े गए। शुरुआत अगस्त महीने में हुई, जब पहले 3 बायसन को इस इलाके में छोड़ा गया। इसके बाद नवंबर महीने में 44 और बायसन का झुंड यहां पहुंचा, जिसमें 38 मादा और 6 नर बायसन शामिल थे। फाउंडेशन के डायरेक्टर गेरार्डो रुईझ-स्मिथ ने इस मौके पर खुशी जताते हुए कहा कि जिस जानवर को इंसान ने दो सदी पहले यहां से खत्म कर दिया था, उसे उसके मूल घर में वापस लाना सिर्फ एक ऐतिहासिक पल नहीं बल्कि प्रकृति को नई जिंदगी देने वाली एक उम्मीद की किरण है।

बायसन रेगिस्तान की तस्वीर कैसे बदलते हैं, यह समझना दिलचस्प है। करीब 750 किलो वजन का यह भारी-भरकम जानवर जब घास के मैदान में चरता है, तो सूखी और पुरानी घास खा जाता है। इससे नई हरी कोंपलों और पौधों को धूप मिलती है। इसके अलावा सूखी घास कम होने से रेगिस्तान या घास के मैदान में अचानक आग लगने का खतरा भी काफी हद तक टल जाता है। यह पूरा प्रोसेस पौधों के दोबारा उगने और जैव विविधता बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी होता है।

बायसन के वजन और उसके खुरों की वजह से जमीन पर पड़ने वाला दबाव भी इकोसिस्टम के लिए फायदेमंद साबित होता है। जब ये जानवर चलते हैं, तो उनके वजन से रेगिस्तान की सख्त हो चुकी ऊपरी परत टूट जाती है और मिट्टी ढीली हो जाती है। इससे जब कभी रेगिस्तान में बारिश होती है, तो पानी बहकर जाने के बजाय जमीन के अंदर गहराई तक जज्ब होता है। इसके अलावा चलते वक्त इनके खुरों से पेड़ों के बीज मिट्टी में गहराई तक दब जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम के बाद अपने आप नए पौधे उग आते हैं।

इस पूरे प्रोसेस में बायसन का गोबर बहुत अहम भूमिका निभाता है। बायसन का गोबर नेचुरल खाद का काम करता है। इस पर तरह-तरह के कीड़े, भुनगे और सूक्ष्मजीव आकर्षित होते हैं। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी में ऑर्गेनिक तत्व मिलाते हैं, जिससे रेगिस्तान की रेतीली मिट्टी की उर्वरता तेजी से बढ़ती है। मतलब सिर्फ 47 बायसन के आने से पूरे कोआहुइला इलाके की मिट्टी, पानी और पौधों का चक्र फिर से जिंदा हो उठा है।

मेक्सिको का यह कामयाब प्रयोग पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन रहा है। बायसन ने साबित कर दिया है कि प्रकृति की किसी एक अहम प्रजाति को उसकी सही जगह वापस मिल जाए, तो पूरा पर्यावरण खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है। लुप्त हो चुके जानवरों को फिर से बसाकर रेगिस्तान में हरियाली लाने की यह कोशिश आने वाले वक्त में ग्लोबल क्लाइमेट चेंज और रेगिस्तान फैलने के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम साबित होगी, इसमें कोई शक नहीं है।

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