मारबत-बडग्या को इवेंट बनाने का आरोप, अनिल देशमुख ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखा
पूर्व मंत्री अनिल देशमुख ने नागपुर मनपा प्रशासन को पत्र लिखकर मारबत-बडग्या परंपरा को इवेंट बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
नागपुर की करीब 145 साल पुरानी मारबत-बडग्या परंपरा को लेकर अब सियासी बहस छिड़ गई है। पूर्व मंत्री अनिल देशमुख ने नागपुर महानगरपालिका आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि इस ऐतिहासिक परंपरा को धीरे-धीरे एक इवेंट में तब्दील किया जा रहा है। देशमुख का कहना है कि इससे परंपरा की मूल भावना और आम नागरिकों की आवाज पर असर पड़ सकता है।
दरअसल इस साल मनपा ने पहली बार मारबत-बडग्या के आयोजन और प्रचार की जिम्मेदारी बड़े स्तर पर खुद उठाई है। इसके लिए करीब 2 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। मनपा प्रशासन का कहना है कि यह पहल शहर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के मकसद से की जा रही है।
अनिल देशमुख ने अपने पत्र में याद दिलाया कि 1881 से चली आ रही यह परंपरा सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं रही। इसके जरिए नागपुर के लोग समय-समय पर सामाजिक और जनसमस्याओं पर भी अपनी बात रखते आए हैं। बडग्यों के माध्यम से महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की दिक्कतों, प्रशासनिक खामियों और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य किया जाता रहा है, यह इस परंपरा की पहचान का हिस्सा है।
देशमुख ने अपने पत्र में यह भी कहा कि आज के वक्त में जनता के सामने महंगाई, बेरोजगारी, बारिश से फसलों को हुआ नुकसान, स्मार्ट मीटर की वजह से बिजली बिलों को लेकर शिकायतें, सड़कों पर गड्ढे और ट्रैफिक जाम जैसी कई समस्याएं हैं। उनके मुताबिक बडग्यों के जरिए इन मुद्दों को उठाना इस परंपरा का एक अहम पहलू रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार राजनीतिक सुविधा और दिखावे की वजह से ऐसे जनमुद्दों को पीछे धकेला जा रहा है, हालांकि यह आरोप देशमुख की तरफ से लगाया गया है। पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि मारबत-बडग्या को सिर्फ पर्यटन, मनोरंजन या एक बड़े आयोजन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह परंपरा हमेशा से जनता की भावनाओं और सामाजिक सवालों को खुलेआम सामने रखने का जरिया रही है। देशमुख ने मनपा प्रशासन से मांग की कि बडग्यों के जरिए नागरिक जो जनमुद्दे और नाराजगी जताते हैं, उसके लिए पर्याप्त आजादी बनी रहनी चाहिए और परंपरा का मूल स्वरूप बरकरार रखा जाना चाहिए।
अपने पत्र में देशमुख ने मनपा प्रशासन से आगे के लिए एक नीति बनाने की भी मांग की है, ताकि मारबत-बडग्या उत्सव के जरिए नागरिक अपनी समस्याएं और मांगें असरदार तरीके से सामने रख सकें। इस साल मनपा की तरफ से उत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित करने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल की गई है। इसी को लेकर अब परंपरा के सांस्कृतिक रूप और इसके सामाजिक-सार्वजनिक अभिव्यक्ति वाले पहलू के बीच बहस भी खड़ी हो गई है।