माणिकगड खदान में प्रतिबंधित लोगों की एंट्री पर विवाद, कोर्ट के आदेश का पालन नहीं
अल्ट्राटेक सिमेंट की माणिकगड खदान में एंट्री गेट को लेकर नया विवाद, कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिबंधित लोग अंदर जा रहे होने का आरोप।
अल्ट्राटेक सिमेंट की माणिकगड खदान में पिछले कुछ दिनों से चल रहे आंदोलन और विवादों की वजह से कंपनी के कामगारों और उनके परिवार वालों में टेंशन का माहौल बना हुआ है। इसी बीच खदान के एंट्री गेट से एंट्री को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
पूरी बात यह है कि कुछ दिन पहले आबिद अली और उनके साथियों ने खदान के गेट पर आंदोलन किया था। इस आंदोलन के दौरान राजुरा तहसीलदार, गडचांदूर पुलिस डिपार्टमेंट और देव्हाडा के डिविजनल ऑफिसर घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने पंचनामा किया। मिली जानकारी के मुताबिक इस पंचनामे में यह लिखा गया कि कोर्ट के ऑर्डर के हिसाब से 21 लोगों को खदान के गेट से अंदर जाने पर रोक लगाई गई है, जबकि बाकी गांव वालों के लिए गेट खुला रखा गया।
इसके बावजूद आरोप है कि जिन 21 लोगों पर बैन लगाया गया, उनमें से कुछ लोग अभी भी खदान के परिसर में एंट्री कर रहे हैं। इन लोगों में भाऊराव किन्नके और रामदास मगम का नाम शामिल है। इतना ही नहीं, एंट्री को लेकर सिक्योरिटी गार्ड और स्टाफ के साथ भी झगड़ा हो रहा है, ऐसी खबर है। इससे खदान की सिक्योरिटी व्यवस्था और कंपनी के काम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पंचनामे और कोर्ट के ऑर्डर में साफ-साफ कुछ खास लोगों की एंट्री पर रोक लगाई गई है, तो उस ऑर्डर का पालन हो, यह कौन तय करेगा? अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और संबंधित सरकारी डिपार्टमेंट इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
फिलहाल चल रहे आंदोलन, विवाद और एंट्री पर लगी रोक का सीधा असर खदान के कामगारों और उनके परिवार वालों के मेंटल स्ट्रेस पर पड़ रहा है। कामगारों का कहना है कि कंपनी के परिसर में शांत और सेफ माहौल बनाए रखना और उनके परिवार वालों की सिक्योरिटी सुनिश्चित करना एडमिनिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी है।
इस वजह से माइन्स कॉलोनी में रहने वाले सारे परिवार अब टेंशन में हैं और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से सिक्योरिटी की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में राजुरा तहसीलदार के पंचनामे की कॉपी, कोर्ट का ऑर्डर और खदान परिसर में एंट्री करने वाले कथित प्रतिबंधित लोगों की फोटो सामने रखी जा रही हैं। इन कागजातों और फोटो के आधार पर यह मांग की जा रही है कि एडमिनिस्ट्रेशन इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और कोर्ट के ऑर्डर और सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करे।
अब सवाल यह है कि जब ऑर्डर और पंचनामा दोनों मौजूद हैं, तो प्रतिबंधित लोगों की कथित एंट्री पर कार्रवाई कब की जाएगी?