गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:48 IST

मां के निधन के बाद चिन्मय दास को महज ५ घंटे की पैरोल, जेल से बाहर आते ही रो पड़े

बांग्लादेश के हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास को मां संध्या रानी के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सिर्फ ५ घंटे की पैरोल मिली।

मां के निधन के बाद चिन्मय दास को महज ५ घंटे की पैरोल, जेल से बाहर आते ही रो पड़े तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बांग्लादेश के हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास पिछले दो साल से पुलिस हिरासत में हैं। हाल ही में उनकी मां के निधन के बाद उन्हें पांच घंटे की पैरोल पर जेल से बाहर निकाला गया। गुरुवार, १० सितंबर को उनकी मां संध्या रानी का निधन हुआ। वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं।

खास बात यह रही कि मां के निधन से पहले चिन्मय दास ने उनसे मिलने के लिए पैरोल की मांग की थी, लेकिन यह अर्जी पूरी तरह ठुकरा दी गई थी। उन्हें तब जेल से बाहर नहीं जाने दिया गया। मां के निधन के बाद अब उन्हें पैरोल दी गई है। मां के जीते-जी आखिरी वक्त में उनसे मिल न पाने का दुख चिन्मय दास के चेहरे पर साफ झलक रहा था। जेल से बाहर निकलते ही वे खुद को रोक नहीं पाए और फूट-फूट कर रो पड़े। इस घटना का फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसे देखकर कई लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दी हैं।

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास को मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महज ५ घंटे की पैरोल पर जेल से बाहर छोड़ा गया। अंतिम संस्कार पूरा होते ही उन्हें फिर पुलिस हिरासत में ले जाया गया। जेल से बाहर आते ही चिन्मय अपने आराध्य राधा-कृष्ण के मंदिर पहुंचे और वहां फूट-फूट कर रोने लगे। वे पुंडरीक मंदिर में भगवान के सामने नतमस्तक हुए और अपना दुख जाहिर किया। परिवार के मुताबिक, मां संध्या रानी का अंतिम संस्कार पुंडरिक धाम में किया गया।

चिन्मय के बड़े भाई रंजन कुमार ने ९ सितंबर को चिन्मय को पैरोल पर छोड़े जाने के लिए अर्जी दी थी। लेकिन चटगांव जिला प्रशासन ने यह अर्जी खारिज कर दी और अगले ही दिन उनकी मां का निधन हो गया। मां की मौत के बाद डिप्टी कमिश्नर जाहिदुल इस्लाम मिया ने चिन्मय को पांच घंटे के लिए बाहर जाने की इजाजत दी।

चिन्मय दास को २५ नवंबर २०२४ में गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रध्वज का अनादर करने का आरोप है, जिस मामले में देशद्रोह के आरोप में उन्हें पुलिस हिरासत की सजा सुनाई गई। गिरफ्तारी के बाद उन पर कई और गंभीर मामले दर्ज किए गए, जिसकी वजह से वे अब तक जेल से जल्दी बाहर नहीं आ सके।

चिन्मय के परिवार ने बताया कि उनकी मां का गुरुवार को हथजारी के एक अस्पताल में निधन हुआ और जेल में बंद बेटा उनकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर सका। उनके भाई ने बताया, "मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे जिंदा थीं तब भी मेरे भाई को उनसे मिलने का मौका नहीं मिला।" बुधवार को परिवार ने चिन्मय की मां से मुलाकात कराने के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन प्रशासन की तरफ से जवाब मिला कि बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए कैदी को पैरोल देने का कोई प्रावधान नहीं है।

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