मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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16:40 IST

मलकापुर में रात को टॉर्च की रोशनी में खेत देखने पहुंचे राजस्व मंत्री बावनकुले, किसानों ने गिनाईं दिक्कतें

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रणधम शिवार में किसानों की बिजली, फसल बीमा, घरकुल अनुदान और कर्ज की समस्याएं सुनीं।

मलकापुर में रात को टॉर्च की रोशनी में खेत देखने पहुंचे राजस्व मंत्री बावनकुले, किसानों ने गिनाईं दिक्कतें
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले शनिवार की रात मलकापुर के रणधम शिवार पहुंचे और किसानों से उनकी परेशानियां सुनीं। उनका तय दौरा करीब दो घंटे देर से शुरू हुआ था। अंधेरा हो चुका था, इसलिए किसान तुलसीराम कांडेलकर के खेत की फसलों को बैटरी यानी टॉर्च की रोशनी में देखा गया।

इस मौके पर सह-पालकमंत्री संजय सावकारे, विधायक चैनसुख संचेती, जिला बैंक के संचालक शिवचंद्र तायडे और बाजार समिति के सभापति संजय काजले मौजूद थे। भाजपा नेता मोहन शर्मा, भगवान पाटील, ज्ञानदेव वाघोदे और मिलिंद डवले के साथ अलग-अलग विभागों के अधिकारी भी आए थे। स्थानीय निवासी जयदीप पाटील ने मंत्री को किसानों के हालात की जानकारी दी।

किसानों ने कई मुद्दे सामने रखे। बिजली सप्लाई की दिक्कत, फसल बीमा की रकम, घरकुल अनुदान और कर्ज के लिए बैंकों से आने वाली अड़चनें इनमें शामिल थीं। निरीक्षण के दौरान किसानों ने कहा कि बिजली बार-बार जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि खेतों में बिजली के तार चोरी होने से भी परेशानी हो रही है। किसानों के मुताबिक बिजली सुचारु न होने से खेती के कामों पर असर पड़ रहा है।

बावनकुले ने किसानों की बात सुनने के बाद संबंधित प्रशासनिक तंत्र को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए। राजस्व, महावितरण, कृषि और भूमि अभिलेख समेत कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी वहां मौजूद थे। इस मौके पर किसानों के सवालों पर तुरंत कार्रवाई की मांग भी की गई।

इसी बीच कारंजा से भी किसानों की तकलीफ की खबर है। वहां बारिश के लंबे अंतराल से जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है, उनके पंचनामे तुरंत करने और असल नुकसान के हिसाब से मदद देने की मांग हो रही है। बांबर्डी गीत में ज्ञानेश्वर की के खेत में 4 एकड़ सोयाबीन में जानवर छोड़ने पड़े। बताया गया कि यह नजारा सिर्फ एक किसान का दर्द नहीं है, बल्कि बारिश के अंतराल से खरीफ सीजन पर आए संकट का जीता-जागता उदाहरण है। जिस सोयाबीन को किसान ने पसीना बहाकर उगाया, उसी में अब जानवर चरने लगे हैं। इसलिए इस गंभीर हालात पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

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