महाराष्ट्र सरकार बना रही अपनी NBFC, इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को सस्ता कर्ज देने की तैयारी
महाराष्ट्र का वित्त विभाग अपनी NBFC बना रहा है, जो सरकारी निकायों को कम ब्याज पर कर्ज देगी।
महाराष्ट्र सरकार का वित्त विभाग अपनी खुद की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) बनाने जा रहा है। इसे एक तरह का 'सरकारी इन-हाउस बैंक' कहा जा रहा है। वित्त विभाग ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी कर दिया है। मकसद 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था और 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्य की तरफ बढ़ना है।
इस योजना का पूरा खाका तैयार करने के लिए जल्द ही एक सलाहकार एजेंसी नियुक्त की जाएगी। यह केंद्र या राज्य के पब्लिक सेक्टर बैंक या सरकारी क्षेत्र की ऐसी सहायक कंपनी होगी, जिसे 20,000 करोड़ की पूंजी या ऋण जुटाने का तजुर्बा हो। एजेंसी इस बड़े संस्थान के ढांचे, लीगल प्रक्रियाओं और पूरे ब्लूप्रिंट पर काम करेगी। अक्टूबर के पहले हफ्ते में चयन की प्रक्रिया हो जाएगी। सरकार ने प्रोजेक्ट को 5 मुख्य चरणों में पूरा करने की समयसीमा भी तय की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने अगले एक दशक में मेट्रो, एक्सप्रेस-वे, स्मार्ट सिटीज, जल परियोजनाओं, सीवरेज, किफायती आवास और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 25 लाख करोड़ से 35 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत आंकी है।
अब तक एमएमआरडीए, एमएसआरडीसी, सिडको, महा रेल और एमआईडीसी जैसे सरकारी निकाय अलग-अलग कमर्शियल बैंकों से महंगे ब्याज पर लोन लेते थे, या फिर सरकारी बजट पर निर्भर रहते थे। इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार अपनी NBFC बना रही है, जो सभी सरकारी विभागों के पास पड़े अतिरिक्त पैसे को एक जगह इकट्ठा करेगी।
इस जमा पूंजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुटाए गए सस्ते फंड से सरकार के अपने प्रोजेक्ट्स को कम ब्याज पर लोन दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स के पैसे की बचत करना और बिना वित्तीय रुकावट के राज्य के सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के स्केल बेस्ड रेगुलेशन के तहत पंजीकृत होने पर यह संस्था सिर्फ राज्य सरकार के विभागों, निकायों और विकास प्राधिकरणों को ही कर्ज देगी। किसी निजी पक्ष को कर्ज नहीं दिया जाएगा। सरकारी निकायों के बॉन्ड्स के लिए क्रेडिट गारंटी और लिक्विडिटी सपोर्ट भी मिलेगा। महाराष्ट्र इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, क्लाइमेट फाइनेंस फंड और अफोर्डेबल हाउसिंग फंड जैसे खास कोषों का प्रबंधन भी यही करेगी।
फिलहाल राज्य के बजट और अलग-अलग निगमों का कर्ज बिखरा हुआ है। नई NBFC राज्य सरकार के लिए केंद्रीकृत ट्रेजरी मैनेजर का काम करेगी, जिससे विकास कार्यों के लिए नकदी की कमी नहीं रहेगी। एमएसआरडीसी, एमएमआरडीए, सिडको, एमआईडीसी और वाटर बोर्ड्स जैसी एजेंसियों ने पहले से वाणिज्यिक बैंकों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज ले रखे हैं।
नई NBFC राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कम लागत पर फंड जुटाएगी और इन निकायों के पुराने महंगे कर्जों को कम ब्याज पर रीफाइनेंस करेगी। इससे ब्याज का हजारों करोड़ रुपये का बोझ बचेगा, जिसे सीधे नई परियोजनाओं में लगाया जा सकेगा।