महाराष्ट्र में बारिश का जोर घटेगा, कोकण और मध्य महाराष्ट्र में छिटपुट बौछारें
मानसून की वापसी शुरू होने के साथ राज्य में बारिश धीरे-धीरे कम हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक 2 से 6 अक्टूबर तक कोकण और मध्य महाराष्ट्र में छिटपुट बारिश होगी, जबकि मराठवाड़ा और विदर्भ में मौसम सूखा रहेगा।
राज्य से मानसून की वापसी शुरू हो गई है और इसके साथ ही पूरे महाराष्ट्र में बारिश का जोर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। मौसम विभाग के नए अंदाज के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों तक राज्य का बड़ा हिस्सा सूखा रहने की संभावना है। हालांकि कुछ चुनिंदा पट्टों में अब भी हल्की बौछारें पड़ सकती हैं, इसलिए किसान और आम लोग मौसम पर नजर रखे हुए हैं।
2 अक्टूबर के लिए विभाग ने कोकण-गोवा और दक्षिण मध्य महाराष्ट्र के जिलों में कुछ जगहों पर बिजली की कड़क और बादलों की गरज के साथ बारिश की पूरी संभावना जताई है। इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अंदाज है। विभागवार देखें तो 2 तारीख को कोकण और मध्य महाराष्ट्र में सिर्फ छिटपुट जगहों पर बारिश होगी, जबकि मराठवाड़ा और विदर्भ में मौसम पूरी तरह सूखा रहने की संभावना है।
3 अक्टूबर को कोकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र के जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इस दिन मराठवाड़ा में आंशिक बादल रह सकते हैं, जबकि विदर्भ में मौसम सूखा ही रहेगा।
4 अक्टूबर को भी कोकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में छिटपुट जगहों पर हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। मराठवाड़ा में आसमान ज्यादातर साफ रहने की पूरी संभावना जताई गई है और विदर्भ सूखा ही रहेगा।
5 और 6 अक्टूबर को राज्य के विभागवार मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा। कोकण और मध्य महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है, जबकि मराठवाड़ा और विदर्भ में मौसम सूखा रहने का अंदाज है।
यानी 2 से 6 अक्टूबर तक हर दिन का विभागवार अंदाज लगभग एक जैसा है। कोकण में छिटपुट बारिश की संभावना है, मध्य महाराष्ट्र में भी छिटपुट बारिश हो सकती है, और मराठवाड़ा व विदर्भ में मौसम सूखा रहने की संभावना है।
मानसून भले ही लौट रहा हो, लेकिन कोकण और मध्य महाराष्ट्र में बीच-बीच में पड़ने वाली छिटपुट बारिश से हवा में थोड़ी ठंडक आ सकती है और उमस से राहत मिल सकती है। दूसरी तरफ मराठवाड़ा और विदर्भ में मौसम ज्यादातर सूखा और साफ रहेगा, जिससे खेती के काम आराम से निपटाने के लिए माहौल अनुकूल बन गया है। 2 अक्टूबर को बिजली कड़कने की संभावना को देखते हुए संबंधित इलाकों के लोगों और किसानों को सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना जरूरी है।