मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार, शेयर बाजार पर दबाव
मध्य पूर्व में संघर्ष और गहराने से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी, ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गई। महंगाई फिर बढ़ने का डर, शेयर बाजारों पर भी असर।
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मध्य पूर्व में जो लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है, उसका सीधा असर अब दुनियाभर की इकॉनॉमी पर दिखने लगा है। संघर्ष और तेज होने से क्रूड ऑयल की सप्लाई को लेकर मार्केट में चिंता बढ़ गई है, और इसी वजह से ब्रेंट क्रूड का भाव प्रति बैरल 100 डॉलर के ऊपर चला गया है।
तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से दुनियाभर में महंगाई फिर से सिर उठा सकती है, ऐसा डर पैदा हो गया है। इसका दबाव अब ग्लोबल शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
मध्य पूर्व दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम इलाका माना जाता है। इस इलाके में संघर्ष बढ़ने से तेल की ढुलाई और सप्लाई चेन के गड़बड़ाने का खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से इन्वेस्टर्स में बेचैनी बढ़ी है, और क्रूड ऑयल के दाम में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है।
खासकर होर्मुझ की खाड़ी के आसपास बढ़े तनाव पर मार्केट की नजर टिकी हुई है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की ढुलाई इसी रूट से होती है, इसलिए यहां किसी भी बड़ी रुकावट का असर सीधे ग्लोबल मार्केट पर पड़ सकता है।
क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का झटका सिर्फ फ्यूल मार्केट को ही नहीं लगता, बल्कि इसका असर शेयर बाजार, इंडस्ट्री और कस्टमर्स के खर्चे पर भी पड़ता है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, प्रोडक्शन और एनर्जी का खर्च बढ़ने की आशंका रहती है। इसका नतीजा यह होता है कि कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
इसी वजह से इन्वेस्टर्स ने रिस्क कम करना शुरू कर दिया है, और ग्लोबल शेयर बाजारों में दबाव का माहौल बन गया है। खासकर जो इकॉनॉमी तेल पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी मुश्किल साबित हो सकती है।
अगर तेल की कीमतें इसी तरह लगातार बढ़ती रहीं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों के सामने महंगाई कंट्रोल करने की चुनौती फिर खड़ी हो सकती है।
पहले से ही आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में अगर मध्य पूर्व का संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल, महंगाई और शेयर बाजार, इन तीनों मोर्चों पर दबाव बढ़ सकता है। आगे आने वाले वक्त में संघर्ष किस दिशा में जाता है और ग्लोबल तेल सप्लाई की क्या स्थिति रहती है, इस पर इन्वेस्टर्स की बारीकी से नजर रहेगी।