लोहा में बारिश की कमी से खरीफ की फसल सूखी, कर्ज में डूबे किसान, चारे-पानी की चिंता
लोहा में बारिश की कमी से खरीफ की खड़ी फसल सूख गई है और किसान कर्ज के बोझ तले हैं।
लोहा : महाराष्ट्र ने १९७२ में भीषण सूखा देखा था। उस दौर के जानकारों की यादों के मुताबिक पोला के बाद हुई बारिश से कुछ इलाकों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन २०२६ के सूखे की तीव्रता अलग ही है। इस बार खरीफ सीजन की खड़ी फसल ही बारिश न होने से सूख गई है और किसानों के सामने अभूतपूर्व आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बुवाई, खाद, दवा छिड़काव और जुताई-गुड़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने वाले किसानों के हाथ आखिर में घोर निराशा ही लगी है।
२०२५ में अतिवृष्टि और गीले सूखे से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था। उस संकट से उबर ही रहे थे कि किसानों ने उधारी, ब्याज पर कर्ज और निजी साहूकारों से पैसे लेकर जून में फिर खरीफ की बुवाई की। इस साल शुरुआत में बारिश हुई, मगर उसके बाद बारिश ने लंबी गैरहाजिरी दिखाई। इससे सोयाबीन, मूंग, उड़द, कपास, तूर समेत कई खरीफ फसलों को बड़ा झटका लगा। कई जगह फसलें सचमुच सूख गई हैं और उपज की उम्मीद ही खत्म हो गई है।
किसान आर्थिक रूप से तबाह हो गए हैं। पिछले साल गीले सूखे ने हाथ में आई फसल छीन ली थी, तो इस बार सूखे ने खड़ी फसल पर ही वार किया। कर्ज का बढ़ता पहाड़, लागत की भरपाई न होना और अगले सीजन के लिए पूंजी की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है। किसानों पर बढ़ते आर्थिक और मानसिक दबाव को देखते हुए प्रशासन को फौरन असरदार मदद शुरू करने की जरूरत बताई गई है। किसानों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सीधी आर्थिक मदद, फसल नुकसान की भरपाई, कर्ज में राहत और अगले सीजन के लिए जरूरी सहारा चाहिए।
फसल के नुकसान के बाद अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जानवरों के चारे और पानी की है। खेत में चारा नहीं है, तो जानवरों को कैसे जिंदा रखें, चारा कहां से लाएं और पीने के पानी का इंतजाम कैसे हो, यह सवाल पशुपालकों के सामने खड़ा है। मराठवाड़ा के कई बांधों और तालाबों में पानी का स्टॉक चिंताजनक है। लोहा तालुका के लिंबोटी बांध में फिलहाल करीब ३६ प्रतिशत पानी बताया जा रहा है, और लोहा समेत आसपास के कई गांवों के पीने के पानी का सवाल इसी बांध पर टिका है। इसलिए उपलब्ध पानी की सख्ती से योजना बनाना जरूरी हो गया है।
कुछ तालाबों में अभी थोड़ा-बहुत पानी बचा है, लेकिन उस पर मोटर से बड़े पैमाने पर पानी खींचा जा रहा है। अगर यह पानी खेती के लिए बेरोकटोक खींचा गया, तो आगे चलकर पीने का और जानवरों का पानी भी कम पड़ने का डर जताया जा रहा है। जानवरों के पीने के पानी के लिए दो महीने का पानी आरक्षित रखने का फैसला लेने की मांग हो रही है।
लोहा शहर के लिए लिंबोटी बांध से महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के जरिए चल रही पानी सप्लाई योजना को जल्द से जल्द चालू कराने की कोशिश जारी है, यह जानकारी मुख्याधिकारी संदीप भोळे ने दी। लोहा शहर में करीब १० हजार प्रॉपर्टी धारक हैं, जबकि अधिकृत नल कनेक्शन करीब १,८०० हैं। बाकी कई परिवारों का पानी घरेलू बोरवेल पर निर्भर है। मुख्याधिकारी भोळे ने यह भी बताया कि सुनेगांव तालाब में फिलहाल दो से तीन महीने चलने लायक पानी मौजूद है।