लाइफ इंश्योरेंस क्यों जरूरी है, परिवार की सुरक्षा के लिए जानें पूरी बात
जिंदगी में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता, ऐसे में परिवार को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए लाइफ इंश्योरेंस कितना जरूरी है, इसे आसान भाषा में समझिए।
जिंदगी में कब क्या हो जाए, कोई नहीं बता सकता। लेकिन हर कोई चाहता है कि बुरे वक्त के लिए पहले से तैयार रहे और अपने घरवालों को सुरक्षित रखे। हमारे यहां ज्वाइंट फैमिली सिस्टम में लोग दिन-रात मेहनत करके पैसा कमाते हैं ताकि बच्चों और बुजुर्गों को अच्छी जिंदगी दे सकें। लेकिन कभी सोचा है कि अगर आपको कुछ हो जाए तो घर की आर्थिक हालत का क्या होगा? यहीं से फाइनेंशियल प्लानिंग की बात शुरू होती है, और इसमें एक चीज हर किसी की जिंदगी में जरूरी मानी जाती है, वो है इंश्योरेंस।
आसान भाषा में कहें तो इंश्योरेंस एक तरह का सेफ्टी नेट है जो बड़े आर्थिक नुकसान से बचाता है। एक जैसे रिस्क वाले लोगों का एक ग्रुप मिलकर एक कॉमन फंड में पैसा डालता है। जब किसी के साथ कोई हादसा होता है, तो उसे इस फंड से भरपाई मिलती है। सीधे कहें तो यह रिस्क शेयर करने का एक तरीका है। पॉलिसी लेने वाला कंपनी को हर साल प्रीमियम भरता है, और बदले में कंपनी वादा करती है कि पॉलिसीधारक को कुछ हो जाए तो नॉमिनी को एक तय रकम मिलेगी। इंश्योरेंस जिंदगी में होने वाले हादसों को रोक नहीं सकता, लेकिन नुकसान होने पर परिवार को जल्दी संभलने में मदद जरूर करता है। जैसे अगर घर का कमाने वाला एक ही शख्स है और परिवार में पांच लोग हैं, तो इंश्योरेंस उस परिवार को मुश्किल वक्त में सहारा देता है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि इंश्योरेंस की क्या जरूरत, इससे अच्छा तो कहीं और पैसा लगा लें। लेकिन मौत कब आएगी, कोई नहीं जानता। ऐसे में घरवालों को अपने की मौत का गम तो सहना ही पड़ता है, ऊपर से आर्थिक संकट भी झेलना पड़ सकता है। खासकर आज के दौर में जब ज्वाइंट फैमिली टूट रही है और लोग न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं, तब लाइफ इंश्योरेंस और भी जरूरी हो गया है। होम लोन या किसी लंबी अवधि के लोन में इंश्योरेंस से परिवार को प्रॉपर्टी बेचने की नौबत नहीं आती। साथ ही जो पैसा आप जिंदा रहते घर पर खर्च करते थे, वो इंश्योरेंस की रकम से पूरा हो सकता है, जैसे राशन और बिजली-गैस का बिल। बच्चों की पढ़ाई और शादी की प्लानिंग में भी अच्छी पॉलिसी काम आती है, साथ ही आगे की देनदारियां चुकाने में भी मदद मिलती है, और सबसे बड़ी बात, पॉलिसी लेने के बाद मन को एक तसल्ली रहती है।
लाइफ इंश्योरेंस भी एक जैसा नहीं होता, जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की पॉलिसी मिलती हैं। टर्म इंश्योरेंस सबसे बेसिक फॉर्म है, कम प्रीमियम में ज्यादा सम एश्योर्ड मिलता है, पॉलिसी की अवधि में मौत हो जाए तो नॉमिनी को बड़ी रकम मिलती है, लेकिन अवधि पूरी होने तक जिंदा रहें तो मैच्योरिटी पर कुछ नहीं मिलता, इसलिए यह जेब पर हल्का और यंगस्टर्स के लिए ठीक माना जाता है। एंडाउमेंट प्लान में इंश्योरेंस के साथ सेविंग भी जुड़ी होती है, किस्त का कुछ हिस्सा कवर में जाता है और बाकी सेविंग अकाउंट में, मैच्योरिटी या बीच में मौत होने पर सम एश्योर्ड मिलता है। यूलिप यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में इंश्योरेंस के साथ मार्केट में निवेश भी जुड़ा होता है, यह वेल्थ बनाने और कवर दोनों का मिक्स है।
ज्यादातर लोग टैक्स बचाने के लिए भी फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले पॉलिसी खरीदते हैं। नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के मुताबिक लाइफ इंश्योरेंस पर कुछ टैक्स बेनिफिट मिलते हैं। जैसे पॉलिसीधारक की मौत पर नॉमिनी को मिलने वाली रकम नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के शेड्यूल टू (2) के तहत टैक्स से छूट में आती है। मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम या सरेंडर वैल्यू पर भी कुछ शर्तों के साथ छूट मिल सकती है, जो सालाना प्रीमियम और सम एश्योर्ड के रेशियो पर निर्भर करती है। टैक्स के नियम हर साल बदलते रहते हैं, इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से लेटेस्ट नियमों के बारे में पूछ लेना बेहतर रहता है।
पॉलिसी लेने से पहले उसकी सारी शर्तें ध्यान से पढ़ लेनी चाहिए। एलिजिबिलिटी, प्रीमियम, वेटिंग पीरियड हर कंपनी में अलग-अलग होता है। प्रपोजल फॉर्म भरते वक्त कंपनी उम्र, सेहत, आदत और पेशे के बारे में पूछती है, इसलिए फॉर्म भरते वक्त सच बताना जरूरी है। सेहत के बारे में गलत जानकारी देने या छुपाने से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, और तब इंश्योरेंस लेने का पूरा मकसद ही बेकार हो जाता है।
सही प्लान चुनना भी उतना ही जरूरी है। सिर्फ इसलिए कोई पॉलिसी मत लीजिए क्योंकि दोस्त, रिश्तेदार या एजेंट ने कहा है। अपनी उम्र, मौजूदा देनदारी, हर महीने का खर्च और कितने लोग आप पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं, यह सब देखकर ही पॉलिसी चुनें। कंपनी के क्लेम सेटलमेंट रेशियो और कस्टमर रिव्यू को अच्छे से देखिए, और जो भी सवाल मन में हो, बेझिझक पूछ लीजिए। इंश्योरेंस एक लंबे वक्त की जिम्मेदारी है, इसलिए सही पॉलिसी चुनना ही समझदारी है।