कोरपना नगरपंचायत के सफाई कर्मचारियों का धरना खत्म, प्रशासन ने लिखित में मानीं मांगें
विधायक देवराव भोंगले की मौजूदगी में नगरपंचायत प्रशासन ने न्यूनतम वेतन, पीएफ और सुरक्षा साधनों पर लिखित आश्वासन दिया।
कोरपना नगरपंचायत के सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 2 अक्टूबर से जो धरना आंदोलन शुरू किया था, वह 4 अक्टूबर को खत्म हो गया। नगरपंचायत प्रशासन ने कर्मचारियों को मांगों पर लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया। यह आश्वासन विधायक देवराव भोंगले की प्रमुख मौजूदगी में दिया गया।
सफाई कर्मचारी कुछ दिनों से अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी थीं। इनमें न्यूनतम वेतन, समय पर और पूरा वेतन, पीएफ की रकम, सुरक्षा साधन और वेतन में फर्क दूर करना शामिल था। साथ ही उनकी मांग थी कि आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई न हो।
नगरपंचायत के मुख्याधिकारी ने लिखित में जो आश्वासन दिया, उसके मुताबिक सफाई कर्मचारियों का वेतन राष्ट्रीयकृत बैंक के जरिए जमा किया जाएगा। कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के हिसाब से वेतन दिया जाएगा। जरूरी सभी सुरक्षा साधन जल्द से जल्द मुहैया कराए जाएंगे।
आश्वासन में यह भी कहा गया है कि आंदोलन में शामिल होने की वजह से किसी भी सफाई कर्मचारी की नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों के पीएफ की रकम हर महीने भरी जाएगी। वेतन में जो फर्क है या जो रकम बाकी है, उसे जल्द से जल्द देने की कार्रवाई की जाएगी। सफाई कर्मचारियों की मांगों का संज्ञान लेकर संबंधित ठेकेदार को जरूरी निर्देश दिए जाएंगे।
इससे कई दिनों से वेतन और सुविधाओं के लिए जूझ रहे सफाई कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने एक और मांग भी रखी थी। उन्होंने कचरा प्रबंधन में कथित अनियमितता, सफाई कर्मचारियों के शोषण और आर्थिक गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा था। नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन इन सवालों को भी गंभीरता से लेकर पारदर्शी जांच करेगा।
आंदोलन भले वापस ले लिया गया हो, पर अब सबकी नजर इस पर है कि लिखित आश्वासन जमीन पर कितना और कितनी जल्दी पूरा होता है। बात सिर्फ कागज पर रहने की नहीं है। कर्मचारियों के खाते में पूरा वेतन, पीएफ की रकम और वेतन का बकाया फर्क जमा होना चाहिए और सुरक्षा साधन भी असल में मिलने चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि उनके संघर्ष की वजह से प्रशासन को आखिर सकारात्मक रुख अपनाना पड़ा। उनमें "एकजुटता के संघर्ष की जीत" की भावना है।
इस मौके पर मुख्याधिकारी राम रावते, सहायक पुलिस निरीक्षक संदीप जमादार, आबिद अली, किशोर बावणे, अरुण डोहे और अमोल आसेकर के साथ गांव के बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।