खाद्य तेल पर आयात शुल्क घटाया, त्योहारों में दाम गिरने की उम्मीद
केंद्र सरकार ने सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क कम किया, इंडस्ट्री बॉडी IVPA का कहना है कि इससे खुदरा बाजार में राहत मिल सकती है।
नई दिल्ली से खबर है कि केंद्र सरकार ने सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में कटौती कर दी है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) नाम की इंडस्ट्री बॉडी का कहना है कि इस फैसले का असर त्योहारों के दिनों में खुदरा बाजार में दिखेगा और खाद्य तेल के दाम नीचे आ सकते हैं।
भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरत का करीब 60 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है। बुधवार को सरकार ने कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) 10 फीसदी से घटाकर सीधे शून्य कर दी। वहीं रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर BCD 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दी गई है। कच्चे सोयाबीन तेल और पाम तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी और रिफाइंड सोयाबीन तेल तथा पाम तेल पर BCD 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी की गई है।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब त्योहारी सीजन नजदीक है। IVPA के अध्यक्ष सुधाकर देसाई के मुताबिक कम आयात शुल्क से आयातित खाद्य तेल की लागत घटेगी, जिससे ग्राहकों के लिए दाम कुछ हद तक काबू में रह सकते हैं।
देसाई ने बताया कि भारत अभी भी अपनी खाद्य तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर ही निर्भर है, इसलिए देश का बाजार इंटरनेशनल कीमतों और ग्लोबल सप्लाई के हालात के हिसाब से ऊपर-नीचे होता रहता है। उनका कहना है कि सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के आयात में जो नई राहत मिली है, उससे पाम तेल की डिमांड कुछ कम हो सकती है। साथ ही B50 बायोफ्यूल की अनिवार्यता लागू होने और पाम की खेती के रकबे में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी रहने से पाम तेल के दाम अपेक्षाकृत ऊंचे बने रहने की उम्मीद जताई गई है।
देसाई ने यह भी साफ किया कि ग्राहकों तक शुल्क कटौती का कितना फायदा पहुंचेगा, यह सिर्फ कस्टम ड्यूटी पर निर्भर नहीं है। इसमें इंटरनेशनल कमोडिटी के दाम, माल ढुलाई का खर्च, एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव, देश में तेल की उपलब्धता और स्टॉक लेवल जैसी कई और बातें भी असर डालती हैं।
उनके मुताबिक आने वाले त्योहारी महीनों में देशभर में तेल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इस लिहाज से नई शुल्क व्यवस्था डिमांड के गणित को भी प्रभावित करेगी। देसाई ने कहा कि सूरजमुखी तेल पर शुल्क कटौती ज्यादा बड़ी है, इसलिए यह पहले से ज्यादा किफायती हो गया है, खासकर साउथ इंडिया के उन इलाकों में जहां इसकी खपत सबसे ज्यादा है।