गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:31 IST

केंद्र सरकार का साखर बाजार में 2.5 लाख टन रिफाइंड शुगर उतारने का फैसला

पेट्रोल-डीजल, LPG और सब्जियों के बाद अब चीनी के दाम भी बढ़े, त्योहारों के सीजन में सरकार ने सप्लाई बढ़ाने का प्लान बनाया

केंद्र सरकार का साखर बाजार में 2.5 लाख टन रिफाइंड शुगर उतारने का फैसला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम का बोझ तो पहले से ही जनता पर है, ऊपर से सब्जियों के बढ़ते भाव ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। अब चाय से लेकर मिठाई तक हर रोज इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे ग्राहकों की परेशानी और बढ़ गई है। त्योहारों के सीजन में चीनी के दाम को कंट्रोल में रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।

चीनी के बढ़ते दाम पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों को देश के बाजार में करीब 2.5 लाख टन रिफाइंड शुगर उतारने की इजाजत दी है। त्योहारों के दौरान डिमांड बढ़ने के चलते मार्केट में सप्लाई बढ़ाना ही इस फैसले के पीछे मुख्य मकसद है।

रेणुका शुगर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सुशील कुमार ने इसकी जानकारी दी। उनके मुताबिक, देश के बाजार में लगभग 2.5 लाख टन ALS रिफाइंड शुगर बेचने का ऑफर दिया गया है।

भारत में रेणुका शुगर्स समेत दो अलग शुगर रिफाइनरीज हैं। ये रिफाइनरीज एक्सपोर्ट के लिए Advance Licensing Scheme यानी ALS के तहत कच्ची चीनी इंपोर्ट करती हैं। पिछले महीने सरकार ने इन रिफाइनर्स को निर्देश दिया था कि ALS के तहत तैयार हुई रिफाइंड शुगर देश के अंदर ही बाजार में बेची जाए।

सरकार के इन कदमों से देश में चीनी के दाम में कुछ हद तक गिरावट आई है, ऐसा बताया जा रहा है। अब अगर एक्स्ट्रा रिफाइंड शुगर बाजार में आती है तो दाम पर और दबाव बनेगा, जिससे ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

इस रिफाइंड शुगर की कीमत करीब तैंतालीस से चौवालीस रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। खास बात यह है कि इंपोर्ट की गई चीनी का खर्च करीब पचास रुपये प्रति किलो तक जा सकता है। इस हिसाब से देश में मिलने वाली रिफाइंड शुगर तुलना में सस्ती साबित हो सकती है।

चीनी के दाम को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है। इनमें 10 लाख टन चीनी की ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को मंजूरी, बड़े यूजर्स और डीलर्स के लिए स्टॉकहोल्डिंग लिमिट में सख्ती, और चीनी के एक्सपोर्ट पर पाबंदी जैसे फैसले शामिल हैं।

रिफाइंड शुगर और फैक्ट्री में बनने वाली मिल शुगर में प्रोसेस और शुद्धता के हिसाब से फर्क होता है। मिल शुगर गन्ने के रस को प्रोसेस करके बनाई जाती है, जिसमें कुछ नैचुरल तत्व और अशुद्धता रह सकती है। दूसरी तरफ रिफाइंड शुगर को मिल शुगर को फिर से पिघलाकर, फिल्टर करके और बची-खुची अशुद्धता हटाकर बनाया जाता है, इसलिए यह ज्यादा प्योर और चमकदार सफेद रंग की दिखती है। मिल शुगर का ICUMSA ग्रेड आमतौर पर 150 से 400 के बीच होता है, जबकि रिफाइंड शुगर का ICUMSA लेवल 45 से कम होता है।

घर के इस्तेमाल के लिए ज्यादातर मिल शुगर ही चलती है, जबकि रिफाइंड शुगर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बेकरी इंडस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और दवा बनाने वाले सेक्टर में होता है। त्योहारों के सीजन में मिठाई, बेकरी आइटम और तरह-तरह के खाने-पीने के सामान की डिमांड बढ़ती है, जिससे चीनी की डिमांड भी बढ़ जाती है। ऐसे में मार्केट में एक्स्ट्रा 2.5 लाख टन रिफाइंड शुगर आने से सप्लाई बढ़ेगी और चीनी के दाम कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इस फैसले का रिटेल मार्केट में चीनी के दाम पर असल में कितना असर पड़ता है और ग्राहकों को वाकई कितनी राहत मिलती है, यह आने वाले वक्त में साफ होगा।

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