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01:28 IST

केडीएमसी में गणेश विसर्जन के १०५ कामों पर ५.२६ करोड़ खर्च, मूर्ति विसर्जन के बाद क्या होता है यह अनदेखा

आरटीआई से सामने आया कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका ने गणेश विसर्जन व्यवस्था पर करोड़ों खर्च तो किए, लेकिन विसर्जन के बाद मूर्तियों और पानी का क्या होता है इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

केडीएमसी में गणेश विसर्जन के १०५ कामों पर ५.२६ करोड़ खर्च, मूर्ति विसर्जन के बाद क्या होता है यह अनदेखा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका इलाके में साल २०२५ में गणेश मूर्तियों के विसर्जन की व्यवस्था पर पूरे ५ करोड़ २६ लाख ३९ हजार ५६३ रुपए खर्च हुए हैं। यह जानकारी आरटीआई यानी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक अर्जी से सामने आई है।

विसर्जन के लिए बनाए गए कृत्रिम हौद, सिंटेक्स की टंकियां, घूमने वाले विसर्जन कक्ष और बाकी इंतजामों को मिलाकर कुल १०५ काम कराए गए थे। इन्हीं १०५ कामों पर यह पूरी रकम खर्च हुई, ऐसा आरटीआई से मिली जानकारी में साफ लिखा है।

यह जानकारी हिंदुत्ववादी और सजग नागरिक विजय ठाकरे ने केडीएमसी से मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि विसर्जन के लिए कितने कृत्रिम हौद बनाए गए, इनकी निविदाएं कैसे निकलीं, कितना खर्च हुआ और सबसे अहम बात यह कि विसर्जन के बाद मूर्तियों की विल्हेवाट किस तरीके से लगाई जाती है।

मिली जानकारी के मुताबिक महानगरपालिका इलाके के कुल १० प्रभागों के लिए १० लाख रुपए से कम रकम की ९८ निविदाएं और १० लाख रुपए से ज्यादा रकम की ७ निविदाएं निकाली गई थीं। इस तरह कुल १०५ काम हुए और इन पर ऊपर बताई गई पूरी रकम खर्च हुई।

लेकिन असली सवाल इसके आगे का है। ठाकरे ने बताया कि विसर्जन के बाद कृत्रिम हौद के पानी पर क्या प्रक्रिया की जाती है और विसर्जित हो चुकी गणेश मूर्तियों को किस तरीके से ठिकाने लगाया जाता है, इसकी कोई कार्यपद्धति रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है। यह बात खुद आरटीआई के जवाब में सामने आई। यानी करोड़ों रुपए खर्च करके विसर्जन का पूरा सेटअप तो खड़ा किया गया, मगर उसके बाद क्या होता है इसका कोई हिसाब-किताब महानगरपालिका के पास नहीं है।

विजय ठाकरे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, "महापालिका गणेशोत्सव में प्रदूषण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करती है, लेकिन विसर्जन के बाद प्राणप्रतिष्ठा हुई गणेश मूर्ति का क्या किया जाता है, इसकी जानकारी ही उपलब्ध ना होना गंभीर बात है। इससे गणेशभक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। महापालिका को विसर्जन व्यवस्था के हर खर्च का हिसाब और विसर्जन के बाद की पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।"

ठाकरे ने यह भी मांग रखी कि महापालिका साल भर के सीवेज यानी सांडपानी प्रबंधन को लेकर भी स्पष्टता दे, क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण पर भारी रकम खर्च की जा रही है। साथ ही उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण मंडल से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

फिलहाल आरटीआई से सामने आए खर्च और विसर्जन के बाद मूर्तियों व पानी के प्रबंधन को लेकर केडीएमसी प्रशासन की आधिकारिक भूमिका क्या है, यह अभी साफ होना बाकी है।

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