करंजी गांव में घोषणा के एक हफ्ते के अंदर मंदिर का काम शुरू, भूमिपूजन हुआ
गोंडपिपरी तालुका के करंजी गांव में गावसभा की घोषणा के एक हफ्ते बाद 28 सितंबर को मंदिर निर्माण का भूमिपूजन हुआ और काम शुरू हो गया।
गोंडपिपरी तालुका के करंजी गांव में मंदिर बनाने का काम शुरू हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप खोब्रागडे की पहल पर 21 सितंबर को गावसभा में मंदिर निर्माण की घोषणा की गई थी। उसके ठीक एक हफ्ते बाद, 28 सितंबर से काम जमीन पर उतर आया।
तालुका का करंजी गांव धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक नजरिए से अहम माना जाता है। गांव में नया मंदिर बनाने की मांग ग्रामस्थों की कई साल से चली आ रही थी। इसी धार्मिक मांग को देखते हुए प्रदीप खोब्रागडे ने गावसभा में भरोसा दिया था कि मंदिर बनाने के लिए जो भी मदद चाहिए, वे करेंगे।
21 सितंबर की घोषणा के मुताबिक 28 सितंबर को भूमिपूजन के साथ मंदिर का काम शुरू किया गया। इस मौके पर करंजी के ग्रामस्थों ने बड़े उत्साह से हिस्सा लिया। ग्रामस्थों का कहना है कि नया मंदिर बनने से गांव के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल को और मजबूती मिलेगी।
प्रदीप खोब्रागडे ने कहा, "गांव का विकास मेरा निजी नहीं, सबका मिलकर तय किया हुआ लक्ष्य है। मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं है, वह गांव की एकता, श्रद्धा और संस्कृति का केंद्र है। ग्रामस्थों के आशीर्वाद से हम यह काम कामयाबी से पूरा करेंगे।"
भूमिपूजन के कार्यक्रम में सुमन जेंगठे, कमल रामगीरवार, रेखा राठोड, सिंधू मोहुर्ले, तारा पचारे, माया आत्राम, झाराबाई चांदेकर, वंदना खोब्रागडे, मनिषा भोयर, वासुदेव मांदाळे, आबाजी मोहूर्ले, सुशील मांदाळे, विशाल कोडापे, अजय चावटकर, अंकुश गोहणे, गणपत जुवारे और बंडू का समेत गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद थे।
खोब्रागडे ने यह भी कहा कि करंजी का मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, एकता और गांव के विकास की निशानी है। उनके मुताबिक ग्रामस्थों के सहयोग से यह मंदिर सबकी आध्यात्मिक तरक्की का केंद्र बनेगा। "दिया हुआ वचन पूरा किया" इसी भावना से भूमिपूजन हुआ है, और अब काम तेजी से पूरा करने के लिए सबको एकजुट होकर आगे आना चाहिए।