कबुतरखाना विवाद: जैन मुनि की आंदोलन की धमकी पर मराठी एकीकरण समिति भिड़ी
मुंबई में बंद कबुतरखानों को लेकर फिर बवाल, जैन मुनि निलेशचंद्र महाराज और मराठी एकीकरण समिति आमने-सामने।
मुंबई के बंद पड़े कबुतरखानों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जैन मुनि निलेशचंद्र महाराज ने कबुतरखाने तुरंत शुरू करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे आंदोलन के साथ-साथ आमरण उपोषण भी करेंगे। इस चेतावनी के बाद इस मुद्दे पर फिर से विवाद खड़ा होने के आसार बन गए हैं।
पिछले कुछ महीनों से मुंबई में कबुतरखानों को लेकर धार्मिक आस्था और सार्वजनिक सेहत के बीच टकराव की हालत बनी हुई है। कबुतरों की बीट और पंखों से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ने की आशंका बताते हुए मुंबई के कई कबुतरखाने बंद कर दिए गए हैं। इन जगहों पर कबुतरों को दाना डालने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में करीब ५१ कबुतरखाने अभी भी बंद हैं।
इसी बीच, लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कबुतरखाने बंद रखने के सरकार के फैसले को मराठी एकीकरण समिति ने अपना समर्थन दिया है। समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने कहा कि बड़ी मात्रा में दाना डालने से लोगों की सेहत पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि कबुतरखाने पूरी तरह बंद करने के बजाय वहां सख्त नियम लागू कर उनका ठीक से पालन करवाया जाना चाहिए। देशमुख ने कहा, "कबुतरों को नैसर्गिक खाना खाने दो। दाना डालकर उन्हें दूसरों पर निर्भर और कमजोर मत बनाओ।"
गोवर्धन देशमुख ने कबुतरखाने शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन की धमकी देने वाले जैन मुनि निलेशचंद्र की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की। उनका आरोप है कि निलेशचंद्र महाराष्ट्र के असली सवालों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। देशमुख ने यह भी कहा कि सरकार को धमकाने वाली भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही मराठी एकीकरण समिति ने मांग की है कि कबुतरखानों को लेकर सरकार के फैसले को सख्ती से लागू किया जाए, दाना डालने वालों पर जुर्माना बढ़ाया जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। जैन मुनि निलेशचंद्र की आंदोलन की धमकी और उसके खिलाफ मराठी एकीकरण समिति के विरोध की वजह से मुंबई में कबुतरखानों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।