इस बार गणपति बप्पा 10 नहीं, पूरे 12 दिन रहेंगे, वजह आई सामने
इस साल हरतालिका और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने से गणेशोत्सव की अवधि 12 दिन तक पहुंच गई है, पंचांगकर्ताओं ने बताई असली वजह
इस बार गणेशोत्सव 10 या 11 दिन का नहीं, बल्कि पूरे 12 दिन का रहने वाला है। बाप्पा का आगमन 14 सितंबर को हो रहा है, और इस बार हरतालिका और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही है। तिथि में बढ़ोतरी होने की वजह से इस बार की अवधि लंबी हो गई है।
सोशल मीडिया पर 12 दिन के इस उत्सव को लेकर तरह-तरह की बातें और किसी दुर्लभ योग की चर्चा चल रही है। मगर पंचांगकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि इसमें कोई अद्भुत या दुर्लभ योग नहीं है, यह सिर्फ तिथि के गणित की वजह से हुआ बदलाव है।
14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत होने जा रही है। सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों की तरफ से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की जोरदार तैयारी चल रही है। इस बार का उत्सव 10 या 11 नहीं, बल्कि 12 दिन का होगा, और इसी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। चूंकि इस साल हरतालिका और गणेश चतुर्थी एक ही दिन आ रही है, इसलिए उसी दिन से गणेशोत्सव शुरू हो जाएगा।
हिंदू धर्म में सारे त्योहार तिथि के हिसाब से मनाए जाते हैं। कभी तिथि का क्षय होता है, तो कभी तिथि की वृद्धि हो जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी तृतीया के दिन पड़ रही है, जिस वजह से तृतीया से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गिनने पर पूरे 12 दिन बन जाते हैं। यही वजह है कि इस साल का उत्सव 12 दिन का होने वाला है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन घर-घर में गणपति की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, जबकि सार्वजनिक गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। चतुर्थी से चतुर्दशी तक की यही तिथियां गिनी जाती हैं, क्योंकि सारे त्योहार तारीख पर नहीं बल्कि तिथि पर निर्भर करते हैं। सामान्य तौर पर चतुर्थी से चतुर्दशी तक की तिथियों का यह समूह कुल 11 तिथियों का होता है। कभी इसमें थोड़ी वृद्धि हो जाती है, तो कभी तिथि का क्षय हो जाता है। इसी वजह से कभी गणपति 10 दिन के होते हैं, तो कभी 11 दिन के।
इस साल 14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन, यानी हरतालिका के दिन ही बाप्पा का आगमन हो रहा है। इसी वजह से इस बार तृतीया से ही गिनती करनी पड़ रही है। तृतीया से अनंत चतुर्दशी तक के दिन गिनें तो 14 सितंबर से 25 सितंबर तक पूरे 12 दिन बनते हैं। इसलिए यह 12 दिन का आंकड़ा कोई दुर्लभ योग नहीं है।
सोशल मीडिया पर यह बताया जा रहा है कि यह योग कई सालों बाद आया है, लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं है, यह सिर्फ एक गलतफहमी है। तिथि की वृद्धि और क्षय के पीछे जो हिसाब-किताब होता है, उसी के आधार पर दिनों की गिनती कम-ज्यादा होती रहती है। इसलिए इस बार का 12 दिन का गणेशोत्सव कोई खास या दुर्लभ योग नहीं है, यह बात पंचांगकर्ताओं ने साफ कर दी है।