इराण में तेहरान में ३,१३,००० लोगों की सैन्य परेड, अमेरिका-इस्रायल को सीधी चेतावनी
इराण-इस्रायल-अमेरिका जंग के २०३ दिन बाद तेहरान में लाखों वॉलंटियर्स की परेड, जमीनी हमले की आशंका के बीच शक्ति प्रदर्शन
इराण और इस्रायल-अमेरिका के बीच जंग को आज ठीक २०३ दिन हो गए हैं। इस दौरान इस्रायल और अमेरिका ने इराण को दबाने के लिए हर तरीका आजमाया है, यहां तक कि इराण के टॉप लीडर्स से लेकर बड़े साइंटिस्ट, नेता और मिलिट्री ऑफिसर्स तक की मौत भी हुई है। इराण के अहम पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिसाइल अटैक करके उसे तबाह कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद इराण जंग में हार मानने को तैयार नहीं है।
इसी बीच दुनिया भर के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अमेरिका और इस्रायल अब जमीन पर सेना उतारकर सीधी जंग छेड़ सकते हैं। इसी की तैयारी के तौर पर इराण ने १८ सितंबर २०२६ को तेहरान में ३,१३,००० लोगों का बड़ा वॉलंटियर अभ्यास या यूं कहें मिलिट्री मार्च आयोजित किया। यह प्रोग्राम Janfadayan-e-Iran यानी इराण के लिए कुर्बानी देने वाले मुहिम के तहत हुआ।
दावा किया जा रहा है कि इराण की राजधानी तेहरान में ३.१३ लाख वॉलंटियर्स इसमें शामिल हुए, और इससे जुड़े वीडियोज सोशल मीडिया पर भी दिख रहे हैं। इस मुहिम का मकसद बताया जा रहा है कि आम नागरिकों को बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग देकर आगे होने वाले संभावित हमलों के लिए तैयार किया जाए।
इराण के अधिकारियों के मुताबिक ६ लाख से ज्यादा लोगों ने मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। इस प्रोग्राम में ड्रोन, मिलिट्री इक्विपमेंट और यूनिफॉर्म पहने वॉलंटियर्स का प्रदर्शन भी किया गया।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह आंकड़ा ३,१३,००० ही क्यों रखा गया। दरअसल यह सिर्फ मिलिट्री आंकड़ा नहीं बल्कि शिया धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। शिया परंपरा के मुताबिक यह मान्यता है कि इतने ही साथी इमाम महदी के साथ खड़े होंगे। इसी वजह से ३,१३,००० का यह आंकड़ा प्रतीकात्मक मायने में भी इस्तेमाल किया जाता है।
फरवरी से चल रही अमेरिका, इस्रायल और इराण के बीच की इस जंग के बीच इस कार्यक्रम को यह संदेश देने के लिए किया गया शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है कि इराण किसी भी संभावित हमले के लिए तैयार है। इराण के अधिकारियों के बयानों से यह साफ झलकता है कि उन्हें आगे जमीनी हमले की आशंका सता रही है।
यानी सीधी भाषा में कहें तो इराण आम नागरिकों को भी शुरुआती मिलिट्री ट्रेनिंग देकर बड़े पैमाने पर एक तरह की रिजर्व फोर्स तैयार कर रहा है, और इसके जरिए अमेरिका और इस्रायल को अपनी बड़ी मैनपावर की ताकत दिखा रहा है।