इनकम टैक्स ऑडिट और ITR भरने की डेडलाइन CBDT ने बढ़ाई, टैक्सपेयर्स को राहत
CBDT ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और ITR फाइल करने की अंतिम तारीख आगे बढ़ा दी है, जिससे टैक्सपेयर्स और CA को राहत मिली है।
टैक्सपेयर्स और CA लोगों के लिए एक बड़ी और राहत की खबर है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज यानी CBDT ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने और ITR यानी इनकम टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख आगे बढ़ा दी है। यह फैसला CBDT ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया है।
यह मुदत बढ़ोतरी उन सभी टैक्सपेयर्स के लिए लागू होगी जो इनकम टैक्स कानून, 1961 की धारा 139(1) के तहत क्लॉज 2 में आते हैं, यानी जिनके खातों का ऑडिट कराना जरूरी है।
पहले जिन टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स ऑडिट लागू है, उनके लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 थी। अब यह तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। मतलब ऐसे टैक्सपेयर्स को ITR भरने के लिए 21 दिन का एक्स्ट्रा टाइम मिल गया है।
ITR के साथ-साथ टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की डेडलाइन भी बढ़ाई गई है। पहले ऑडिट रिपोर्ट देने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है।
यह राहत मुख्य रूप से उन कंपनियों और दूसरे टैक्सपेयर्स को मिलेगी जिनके खातों का ऑडिट इनकम टैक्स एक्ट या दूसरे लागू कानूनों के हिसाब से जरूरी है। इसके अलावा नॉन-कंपनी असेसी जिन पर टैक्स ऑडिट लागू है, ऑडिट वाली फर्म के वर्किंग पार्टनर और जिन ट्रस्ट में कानून के मुताबिक खातों का ऑडिट जरूरी है, उन सबके लिए भी ITR भरने की तारीख 21 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
हालांकि ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े मामलों को यह राहत नहीं मिलेगी। ऐसे केसों में ITR भरने की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 ही रहेगी। फॉर्म 3CEB भरने की डेडलाइन भी 31 अक्टूबर 2026 पर बनी रहेगी, इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
बहुत सी जगह टैक्स ऑडिट का काम अभी चल ही रहा था, कई कंपनियों के खाते पूरी तरह तैयार नहीं थे और ऑडिटर को जरूरी जानकारी देने का काम भी बाकी था। ऐसे में यह एक्स्ट्रा टाइम काफी काम आएगा। नॉन-ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में टैक्स ऑडिट की तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 और ITR की तारीख 31 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 की गई है।
फिर भी सलाह यही है कि मिले हुए एक्स्ट्रा टाइम को आखिरी दिनों तक काम टालने के लिए इस्तेमाल न करें। अगर टैक्स लायबिलिटी पहले से तय है तो टैक्स जल्दी भर देना ही सही रहेगा, क्योंकि देर होने पर ब्याज लगने का खतरा बना रहता है।
देशभर के कई चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए भी यह डेडलाइन बढ़ना राहत की बात है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से ITR ई-फाइलिंग पोर्टल और ICAI UDIN पोर्टल पर लगातार टेक्निकल दिक्कतें आ रही थीं।
हर टैक्सपेयर के लिए इनकम टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं होता। जिन टैक्सपेयर्स पर कानून के हिसाब से टैक्स ऑडिट लागू है, उन्हें CA से ऑडिट कराना होता है। CA ऑडिट पूरा करने के बाद टैक्स ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड करता है।
21 दिन की यह मुदत बढ़ोतरी उन बड़े और कॉम्प्लेक्स बिजनेस के लिए खासतौर पर अहम है जहां बड़े पैमाने पर ऑडिट और डेटा मिलान की जरूरत होती है। साथ ही अगर संबंधित टैक्सपेयर 21 नवंबर 2026 तक ITR भर देते हैं तो उसे समय पर भरा हुआ ITR ही माना जाएगा, जिससे बिजनेस लॉस और कैपिटल लॉस आगे कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार और समय पर ITR भरने पर निर्भर कुछ डिडक्शन का दावा करने की पात्रता बनी रहेगी।