होंडा ने F1 पावर यूनिट प्रोग्राम की कमान बदली, एस्टन मार्टिन की खराब परफॉर्मेंस के बाद फैसला
फॉर्मूला 1 में 2026 के नए नियमों के हिसाब से उम्मीद के मुताबिक परफॉर्मेंस न दे पाने के बीच होंडा ने अपने पावर यूनिट डेवलपमेंट प्रोग्राम की लीडरशिप में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि 1 अक्टूबर से फुकाओ योइचिरो लार्ज प्रोजेक्ट लीडर की जिम्मेदारी संभालेंगे। अभी तक फुकाओ योइचिरो डेप्युटी लीडर के पद पर थे, और अब वे इस प्रोग्राम को अब तक देख रहे तेत्सुशी काकुडा की जगह लेंगे।
होंडा का कहना है कि यह बदलाव अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी ट्रांजिशन प्रोसेस का हिस्सा है ताकि तकनीकी स्किल और अनुभव अगली पीढ़ी के इंजीनियरों तक ठीक से पहुंचाया जा सके। 2026 में लागू हुए नए नियमों के बाद पावर यूनिट डेवलपमेंट का पूरा स्वरूप बदल गया है, और 2027 से भी नियमों में और बदलाव की उम्मीद है। इसी वजह से होंडा शुरुआत से ही एक मजबूत डेवलपमेंट सिस्टम खड़ा करना चाहता है, ताकि आगे चलकर कंपनी एक कॉम्पिटिटिव पावर यूनिट बना सके।
फिलहाल होंडा एस्टन मार्टिन को F1 पावर यूनिट सप्लाई कर रहा है, लेकिन 2026 सीजन में यह पार्टनरशिप उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाई है। एस्टन मार्टिन की कार स्पीड और रिलायबिलिटी, दोनों मामलों में प्रतिद्वंद्वियों से पीछे रह गई है। होंडा के पावर यूनिट में भी पावर की कमी और रिलायबिलिटी से जुड़ी दिक्कतें सामने आई हैं, जिसका सीधा असर टीम की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर पड़ा है।
पॉइंट्स टेबल में भी एस्टन मार्टिन की हालत खराब रही है। स्पैनिश ग्रां प्री तक एस्टन मार्टिन टेबल में नई टीम कैडिलैक से ऊपर रहने वाली इकलौती टीम थी। फर्नांडो अलोंसो ने 2 रेस में सिर्फ 3 पॉइंट्स जीते हैं, जबकि लांस स्ट्रोल को अभी तक एक भी पॉइंट नहीं मिला है। स्पैनिश ग्रां प्री में ब्रेक की दिक्कत की वजह से स्ट्रोल रेस पूरी नहीं कर पाए। अलोंसो ने रेस पूरी तो की, लेकिन वे विजेता से 2 लैप पीछे रहकर 17वें स्थान पर आए।
फुकाओ योइचिरो का होंडा के साथ लंबा अनुभव रहा है। वे 2002 से होंडा से जुड़े हैं और शुरुआत में उन्होंने इंजन और गियरबॉक्स कंट्रोल सिस्टम के डेवलपमेंट पर काम किया था। 2009 से 2011 के बीच उन्होंने होंडा के मोटोजीपी प्रोग्राम में भी योगदान दिया। इसके बाद वे हाइब्रिड सिस्टम के डेवलपमेंट पर फोकस करते हुए दोबारा F1 प्रोजेक्ट में लौटे। साल 2017 में और फिर 2022 में वे F1 प्रोजेक्ट के डेप्युटी लीडर बने। इसी अनुभव की वजह से नई लीडरशिप के तहत होंडा के F1 पावर यूनिट में सुधार की काफी उम्मीद जताई जा रही है।