गोरेगाव के मोतीलाल नगर पुनर्विकास में 15 एकड़ में बनेगा हरित क्षेत्र
म्हाडा के 143 एकड़ के प्रोजेक्ट में 3,700 परिवारों का पुनर्वसन होगा, साथ ही 1,500 पुराने पेड़ भी बचाए जाएंगे।
गोरेगाव पश्चिम के मोतीलाल नगर 1, 2 और 3 इलाकों के पुनर्विकास से मुंबई को एक बड़ा हरा-भरा हिस्सा मिलने वाला है। महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी म्हाडा के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में 15 एकड़ से ज्यादा हरित क्षेत्र बनाया जाएगा। इतनी घनी आबादी वाले पश्चिमी उपनगर में इतनी बड़ी खुली और हरी जगह मिलना इस प्रोजेक्ट को खास चर्चा में ले आया है।
यह पूरा पुनर्विकास करीब 143 एकड़ के प्लॉट पर हो रहा है, जिसे म्हाडा सी एंड डीए यानी बांधकाम व विकास संस्था मॉडल के तहत चला रही है। कुछ महीने पहले इसका मास्टर प्लान निवासियों के सामने रखा गया था। गोरेगाव पश्चिम में न्यू लिंक रोड के पास मोतीलाल नगर 1 और मोतीलाल नगर 2-3 नाम के दो मुख्य प्लॉट हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट से करीब 3,700 म्हाडा फ्लैटधारक परिवारों का पुनर्वसन किया जाएगा। राज्य सरकार के जरिए चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट की कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मास्टर प्लान की सबसे अहम बात यह है कि इसमें 15 एकड़ हरित क्षेत्र की व्यवस्था की गई है, जो कुल प्लॉट का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है। मुंबई जैसे घने और तेजी से बढ़ते शहर में इतना बड़ा हरित क्षेत्र बनना पर्यावरण के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है। पुनर्वसन इमारतों के पोडियम लेवल पर बड़ी हरी जगहें, बगीचे और खुली जगहें बनाई जाएंगी। इसके अलावा सड़कों और पैदल रास्तों के किनारे बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर वृक्षों से ढके रास्ते भी बनाने की योजना है।
इस प्रोजेक्ट की एक और खास बात यह है कि मोतीलाल नगर इलाके में मौजूद 1,500 से ज्यादा पुराने पेड़ों को बचाने का फैसला म्हाडा ने लिया है। पुनर्विकास के दौरान इन पेड़ों को काटे बिना इन्हें संभालने पर जोर दिया जाएगा। इनमें पारस पीपल यानी इंडियन ट्यूलिप, नीम, बरगद, कदंब, जामुन, गूलर, आम, कटहल, नारियल, सप्तपर्णी और देशी बदाम जैसे भारतीय प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। इस तरह नए निर्माण के साथ-साथ पुरानी प्राकृतिक विरासत भी बची रहेगी।
म्हाडा फिलहाल क्लस्टर पुनर्विकास को प्राथमिकता दे रही है, जिसमें सिर्फ पुरानी इमारतों का पुनर्वसन नहीं, बल्कि पूरे इलाके को योजनाबद्ध तरीके से बदलने की कोशिश की जा रही है। मोतीलाल नगर प्रोजेक्ट में आधुनिक इमारतों, अंदरूनी सड़कों, बुनियादी सुविधाओं, बगीचों, खुली जगहों और वृक्षों से ढके इलाके के बीच संतुलन बनाया जाएगा। इससे आगे चलकर मुंबई की दूसरी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए यह एक मिसाल बन सकता है।
गोरेगाव पश्चिमी उपनगर का एक अहम और अच्छी कनेक्टिविटी वाला केंद्र बनता जा रहा है, और मेट्रो 3 जैसी सुविधाओं से इलाके की कनेक्टिविटी और बढ़ी है। यहां आधुनिक घरों के साथ बड़े पैमाने पर बगीचे और हरित क्षेत्र मिलने से निवासियों को साफ-सुथरी, सेहतमंद और पर्यावरणपूरक जीवनशैली मिलने की उम्मीद है।
म्हाडा के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जयस्वाल के मुताबिक, क्लस्टर पुनर्विकास का मतलब सिर्फ नए घर बनाना नहीं, बल्कि एक सक्षम और सर्वांगीण नागरी बस्ती बनाना है। उनका कहना है कि मोतीलाल नगर में आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, शाश्वत योजना और करीब 15 से 17 एकड़ हरित क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रकृति और शहरी जीवन के बीच संतुलन रखने वाली भविष्य की बस्ती तैयार हो सके। जयस्वाल के अनुसार मोतीलाल नगर का पुनर्विकास मुंबई में हाउसिंग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का नया आदर्श भी बन सकता है।