गोंदिया-बल्लारशाह रेल्वे ट्रैक पर मादा अस्वल की मौत, तळोधी में ट्रेन की टक्कर
तळोधी वनपरिक्षेत्र के आलेवाही बीट में रेल्वे की टक्कर से एक पूर्ण वयस्क मादा अस्वल की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उसकी बरगड्यां टूटी हुई मिलीं और शरीर के अंदरूनी हिस्सों को गंभीर चोट पहुंची थी।
गोंदिया-बल्लारशाह रेल्वे मार्ग पर एक और वन्यजीव की जान गई है। ब्रह्मपुरी वनविभाग के अंतर्गत आने वाले तळोधी वनपरिक्षेत्र की आलेवाही बीट में एक पूर्ण वयस्क मादा अस्वल रेल्वे की टक्कर में मारी गई। पटरी के किनारे काम कर रहे मजदूरों को अस्वल मृतावस्था में पड़ी दिखी, तो उन्होंने फौरन तळोधी वनविभाग को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही ब्रह्मपुरी के उपवनसंरक्षक डॉ. कुमारस्वामी के मार्गदर्शन में सहाय्यक उपवनसंरक्षक डॉ. महेश गायकवाड, तळोधी के वनपरिक्षेत्र अधिकारी तेजस सूर्यवंशी और बायोलॉजिस्ट राकेश अहुजा ने जरूरी निर्देश दिए। इनके हिसाब से क्षेत्र सहाय्यक अरविंद मने और वनरक्षक बांगर मौके पर पहुंचे। साथ ही वन्यजीव अभ्यासक और स्वाब (SWAB) संस्था के अध्यक्ष यश कायरकर तथा बचाव दलप्रमुख जीवेश सयाम भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। सबने मिलकर पंचनामा किया, जिसके बाद अस्वल के शव को पोस्टमार्टम के लिए सावरगाव के वन आगार में ले जाया गया।
पशुसंवर्धन नागभीड के सहाय्यक आयुक्त डॉ. सतीश तांबे, तळोधी की पशुवैद्यकीय अधिकारी डॉ. ईशा आकरे और चंद्रपूर टीटीसी के पशुवैद्यकीय अधिकारी डॉ. कुंदन पोचलवार ने मिलकर पोस्टमार्टम पूरा किया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि रेल्वे की जोरदार टक्कर से अस्वल की पसलियां टूट गई थीं और शरीर के अंदरूनी हिस्सों को इतनी गंभीर चोट पहुंची थी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सावरगाव वन आगार में मौजूद वनाधिकारी, स्वाब संस्था के लोगों और स्टाफ की मौजूदगी में नियम के मुताबिक अस्वल का अंतिम संस्कार किया गया।
गोंदिया-बल्लारशाह रेल्वे मार्ग नवेगाव-नागझिरा, ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प और ब्रह्मपुरी वनविभाग के लगातार चलने वाले जंगल इलाके से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस ट्रैक पर हर साल तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की टक्कर में बाघ, तेंदुआ, अस्वल, गौर, नीलगाय, सांबर और चीतल जैसे कई वन्यजीव जान गंवाते हैं।
इस घटना के बाद फिर एक बार आरोप लगा कि रेल्वे विभाग जरूरी उपाय करने में बार-बार लापरवाही बरत रहा है। स्वाब संस्था ने मांग रखी है कि जंगल से गुजरने वाले रेल्वे ट्रैक के दोनों तरफ मजबूत जाली की फेंसिंग लगाई जाए, ताकि ऐसे हादसे रुक सकें। स्वाब संस्था के अध्यक्ष यश कायरकर ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द सही कदम नहीं उठाए, तो वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।