गणेशोत्सव में वसई विरार में बस सेवा ठप्प, हजारों यात्री परेशान
आधे वेतन को लेकर चालक-वाहकों की हड़ताल से शहर की परिवहन सेवा अटकी
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गणेशोत्सव के बीच वसई-विरार महानगरपालिका की परिवहन सेवा एक बार फिर ठप्प पड़ गई। पूरे महीने काम करने के बावजूद पूरा वेतन ना मिलने का आरोप लगाते हुए चालक-वाहकों और अन्य कर्मचारियों ने शनिवार से काम बंद आंदोलन छेड़ दिया।
सुबह से एक भी बस सड़क पर नहीं दौड़ी, जिससे गणेशोत्सव की खरीदारी के लिए घर से निकले लोगों के साथ-साथ स्कूल के बच्चों, बुजुर्गों और नौकरी पर जाने वाले हजारों यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
महापालिका के परिवहन विभाग के पास फिलहाल 120 बसें हैं, जिनमें से 40 ई-बसें हैं। ये बसें शहर के 38 रूटों पर रोजाना करीब 2200 फेरे लगाती हैं और इस सेवा से रोजाना 60 से 65 हजार यात्री सफर करते हैं। ऐसे में अचानक बस सेवा बंद होने से शहर की सार्वजनिक यातायात व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा।
इससे पहले 11 अगस्त को भी चालकों और वाहकों ने अलग-अलग मांगों को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों पर हल निकालने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन वापस लिया गया था।
लेकिन गणेशोत्सव शुरू होते ही दोबारा काम बंद आंदोलन शुरू हो जाने से यह साफ है कि परिवहन सेवा की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। बस सेवा बंद होने से यात्रियों को रिक्शा और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। गणेशोत्सव के दौरान बाजारों में खरीदारी के लिए वैसे ही भीड़ बढ़ी हुई थी, ऐसे में बस सेवा ठप्प होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई।
कर्मचारियों का आरोप है कि गणेशोत्सव के चलते खर्च बढ़ा हुआ है, फिर भी ठेकेदार ने पूरे महीने का वेतन देने के बजाय आधा ही वेतन दिया। कर्मचारियों ने गुस्से में सवाल उठाया कि हम पूरे महीने काम करते हैं, त्योहार के समय हमारे परिवार का भी खर्च होता है, ऐसे में अगर वेतन ही अधूरा मिलेगा तो घर कैसे चलाएंगे।
परिवहन प्रबंधक धैर्यशील जाधव ने साफ किया कि बस सेवा फिर से शुरू करने के लिए परिवहन विभाग की ओर से कोशिशें जारी हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को कर्मचारियों की मांगों पर सही हल निकालकर तुरंत सेवा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं डिपो प्रबंधक किरण शेरेकर ने कहा कि महापालिका की ओर से विभिन्न योजनाओं के भुगतान ना मिलने के कारण फंड की दिक्कत आ रही है। फिर भी कर्मचारियों को वेतन दिया गया है और कर्मचारियों से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश जारी है।