गणपति विसर्जन के बाद सिंधुदुर्ग में मछली खरीदने वालों की भारी भीड़, दाम दोगुने
गणेश उत्सव खत्म हो चुका है और श्रावण का महीना भी निकल गया है। इसके बाद कोकण के बाजारों में मछली खरीदने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कोकणवासी और मछली के शौकीन बड़ी तादाद में खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। कोकण की सुंदर समुद्री किनारा पट्टी की पहचान अपनी जगह है, लेकिन इन दिनों वहां के बाजारों में मछली की खरीद ही चर्चा में है।
सिंधुदुर्ग जिले के मालवण में दांडी किनारे पर सबसे ज्यादा भीड़ दिख रही है। गणेश उत्सव अभी-अभी खत्म हुआ है, इसलिए लोग बड़ी संख्या में यहां मछली खरीदने आ रहे हैं। यहां मछुआरे बड़ी मात्रा में मछली बेचने के लिए लाते हैं। खरीद-बिक्री के साथ यहां मछलियों की नीलामी भी होती है। दांडी किनारे पर आने वाली मछली ताजी होती है, इसीलिए लोग यहीं का रुख करते हैं।
गणेश उत्सव और श्रावण खत्म होने से मछली खाने वालों की तादाद बढ़ गई है। खरीदार ज्यादा आने की वजह से मछली के दाम भी दोगुने हो गए हैं। बड़ी संख्या में लोग मछली खरीदने के लिए जुट रहे हैं और इसी वजह से दाम चढ़े हैं। इससे मछली के शौकीनों को निराशा हाथ लगी है।
कोकण में मछली खाने वाले ज्यादा हैं और भीड़ भी बहुत है, इसलिए मछली महंगे दाम पर बिक रही है। पापलेट पहले 500 रुपये किलो के भाव से बिकती थी, अब उसका दाम 1200 रुपये किलो है।
सुरमई पहले 600 रुपये किलो थी, अब 1000 रुपये किलो पर बिक रही है। मोरी मछली पहले 300 रुपये किलो मिलती थी, अब उसका भाव 700 रुपये किलो है। बांगडा पहले 200 से 250 रुपये किलो के भाव से बिकता था, अब 500 रुपये किलो में मिल रहा है।
कुल मिलाकर मालवण के दांडी किनारे पर भीड़ बढ़ी है और उसी के साथ मछली के दाम भी चढ़े हैं। कोकणवासियों और मछली खाने वालों को इस महंगाई से निराशा हुई है, जबकि ताजी मछली की वजह से लोग फिर भी इसी जगह पर खरीदारी के लिए आ रहे हैं।