गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:34 IST

गणपती बप्पा की स्थापना में कलश क्यों रखा जाता है, जानिए इसमें क्या-क्या डाला जाता है

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की मूर्ति के साथ कलश की स्थापना क्यों जरूरी मानी जाती है और इसमें कौन-सी चीजें रखी जाती हैं, पढ़िए पूरी जानकारी।

गणपती बप्पा की स्थापना में कलश क्यों रखा जाता है, जानिए इसमें क्या-क्या डाला जाता है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गणेश चतुर्थी पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाई जाती है। इस दिन घरों और मंडपों में विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह उत्सव शुरू होता है और भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी को बप्पा के विसर्जन के साथ यह 10 दिन का उत्सव खत्म होता है।

बप्पा की स्थापना के वक्त मूर्ति के साथ कलश रखना खास मायने रखता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक कलश को शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन गणपति स्थापना में कलश क्यों जरूरी है और इस कलश में कौन-सी सात चीजें रखी जाती हैं, यह बहुतों को नहीं पता।

गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और शुभ शकुन देने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करने से रुकावटें दूर हो जाती हैं और सफलता का रास्ता खुल जाता है। गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना करना भक्तों के स्वागत के लिए बप्पा के आने का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान भक्त गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल फूल चढ़ाते हैं, उसके बाद आरती और मंत्रोच्चार होता है। बप्पा की स्थापना सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि परिवार में सुख, शांति, आपसी मेल-मिलाप और पॉजिटिव एनर्जी बनी रहे, इस भावना से जुड़ी हुई परंपरा भी है।

हिंदू पूजा में कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणपति की स्थापना से पहले पूजा की जगह को साफ किया जाता है और फिर कलश की स्थापना की जाती है। आमतौर पर मिट्टी, तांबे या पीतल के कलश में पानी भरा जाता है और उस पर आम या अशोक के पत्ते व एक नारियल रखा जाता है। मान्यता है कि कलश का पानी जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि नारियल पूर्णता और शुभता दर्शाता है। पूजा की जगह को शुद्ध और ऊर्जावान बनाने के लिए कलश स्थापित करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना के वक्त कलश को गणपति के पास ही रखा जाता है। कई घरों में पूजा की शुरुआत में पहले कलश स्थापित किया जाता है, उसके बाद गणपति का आवाहन, संकल्प और पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह परंपरा पूरी पूजा के लिए एक शुभ नींव तैयार करती है।

कलश में साफ पानी, चावल, सुपारी, सिक्के, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखे जाते हैं।

गणपति की स्थापना करते वक्त पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करके कलश को एक चौकी पर रखना चाहिए। कलश में शुद्ध पानी भरें और उसमें साबुत चावल के दाने, गंगाजल, सुपारी और एक सिक्का डालें। कलश के मुंह पर आम या अशोक के पत्ते रखें और उसके ऊपर एक नारियल रखें। कलश के पास ही गणपति की मूर्ति रखी जाती है, उसके बाद कलश और बप्पा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। अलग-अलग इलाकों और परिवारों की परंपरा के हिसाब से कलश स्थापना का तरीका और उसमें रखी जाने वाली चीजें थोड़ी अलग-अलग भी हो सकती हैं। इस तरह कलश और गणपति की स्थापना पूजा की पवित्रता, शुभता और भलाई से जुड़ी हुई मानी जाती है। मान्यता है कि पूरी श्रद्धा और सही विधि से की गई गणेश पूजा से बप्पा प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।

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