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22:40 IST

गडचिरोली की सिविल सर्जन डॉ. वर्षा लहाडे कर्तव्य में लापरवाही पर निलंबित, विभागीय जांच के आदेश

गडचिरोली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने जिला शल्यचिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे को निलंबित कर दिया है।

गडचिरोली की सिविल सर्जन डॉ. वर्षा लहाडे कर्तव्य में लापरवाही पर निलंबित, विभागीय जांच के आदेश
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गडचिरोली की स्वास्थ्य व्यवस्था के कामकाज को लेकर काफी समय से चल रही शिकायतें आखिरकार एक बड़ी कार्रवाई में बदल गई हैं। जिले की स्वास्थ्य यंत्रणा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाली जिला शल्यचिकित्सक डॉ. वर्षा शिवाजी लहाडे को महाराष्ट्र सरकार ने निलंबित कर दिया है। उन पर पर्यवेक्षकीय जिम्मेदारी निभाते समय गंभीर लापरवाही, ढिलाई और कर्तव्य में कसूर करने का आरोप है। सरकार ने १६ सितंबर २०२६ को निलंबन का आदेश जारी करते हुए इस मामले में विभागीय जांच के भी निर्देश दिए हैं।

डॉ. लहाडे को दिसंबर २०२५ में गडचिरोली के जिला शल्यचिकित्सक पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन नियुक्ति के बाद से ही उनके कामकाज के तरीके को लेकर शिकायतें सामने आने लगी थीं। अहेरी के उपजिला अस्पताल में डॉक्टरों के इस्तीफे, मरीजों को इलाज में हो रही दिक्कतें और प्रशासनिक कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए गए थे। अगस्त में पूर्व पंचायत समिति सदस्य अमिता मडावी ने डॉ. लहाडे के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नागपुर में आंदोलन भी किया था। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए सरकार ने चार सदस्यों की एक जांच समिति बनाई थी। इसी दौरान चामोर्शी के ग्रामीण अस्पताल में एक मां और नवजात बच्चे की मौत के मामले में भी मेडिकल लापरवाही के आरोप लगे थे, जिसके बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के कामकाज पर सवालिया निशान लग गया था।

राज्य सरकार ने अहेरी में एक बड़ा महिला व बाल अस्पताल बनवाया है, लेकिन इस अस्पताल के कुछ डॉक्टरों के अचानक इस्तीफा देने से स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक कामकाज पर चर्चा शुरू हो गई थी। यह शिकायतें भी सामने आई थीं कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर जिला शल्यचिकित्सक का कोई असरदार नियंत्रण नहीं है। गडचिरोली जैसे दूरदराज और स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण जिले में डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ के खाली पड़े पद, अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और मरीजों के इलाज का सवाल हमेशा चर्चा में रहता है। ऐसी स्थिति में वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से असरदार निगरानी और प्रशासन की जिम्मेदारी और भी अहम हो जाती है। इसी पृष्ठभूमि में डॉ. लहाडे पर हुई निलंबन की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि साल २०१७ में नाशिक में कथित अवैध गर्भपात के मामले में भी डॉ. लहाडे पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। अब गडचिरोली में कामकाज के तरीके को लेकर दोबारा निलंबन होने से स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है।

सरकार के आदेश के मुताबिक निलंबन की अवधि में डॉ. लहाडे का मुख्यालय सामान्य अस्पताल, गोंदिया रहेगा। सक्षम अधिकारियों से पहले इजाजत लिए बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। उनके खिलाफ विभागीय जांच होगी और इसी जांच में आरोपों पर आगे का फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गडचिरोली के पालक मंत्री हैं, इसलिए जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शिकायतों और प्रशासन के कामकाज पर हुई इस कार्रवाई की खासतौर पर चर्चा हो रही है। लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक तरीके से मिलें और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय हो, इस नजरिए से सरकार के इस फैसले को देखा जा रहा है।

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