मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

एशियाई खेलों में मैराथन का 44 साल का सूखा खत्म, सावन बरवाल ने जीता सिल्वर

जापान के आइची नागोया में जारी एशियाई खेलों में सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में रजत पदक जीता, गोल्ड सिर्फ 48 सेकंड से हाथ से निकला

एशियाई खेलों में मैराथन का 44 साल का सूखा खत्म, सावन बरवाल ने जीता सिल्वर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

जापान के आइची नागोया में चल रहे एशियाई खेल 2026 में 26 सितंबर का दिन भारत के लिए खास बन गया। भारतीय सेना के जवान सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में रजत पदक अपने नाम किया। इसी के साथ उन्होंने एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना डाला। यह पदक भारत के लिए और भी खास इसलिए है क्योंकि एशियाई खेलों की मैराथन स्पर्धा में भारत को 44 साल बाद कोई पदक मिला है।

28 साल के बरवाल ने 42.195 किलोमीटर की मैराथन दौड़ 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरी की। जापान के इचिताका यामाशिता ने महज 48 सेकंड पहले, यानी 2:10:49 के समय के साथ रेस खत्म कर सोना जीता। चीन के पेयू फेंग ने 2:12:13 के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इससे पहले भारत ने एशियाई खेलों की मैराथन स्पर्धा में आखिरी बार 1982 में पदक जीता था।

फाइनल रेस में सावन बरवाल की परफॉर्मेंस उतार-चढ़ाव भरी रही। शुरुआत में उन्होंने बढ़त बनाई, लेकिन आधी दूरी तक आते-आते वे दूसरे नंबर पर खिसक गए। इसके बाद 21 किलोमीटर पर उन्होंने फिर बढ़त हासिल की, मगर आखिर में वे पीछे छूटने लगे। रेस के आखिरी कुछ किलोमीटर में बरवाल ने जबरदस्त वापसी करते हुए कई धावकों को पीछे छोड़ा और 2:11:37 के समय के साथ रेस पूरी की, जिससे उन्हें रजत पदक मिला।

भारत का 44 साल का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ है। इससे पहले 1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में होसूर कुक्कप्पा सितारन ने भारत के लिए मैराथन में कांस्य पदक जीता था। एशियाई खेलों में मैराथन पदक जीतने वाले बरवाल चौथे भारतीय बन गए हैं। इससे पहले 1951 में दिल्ली में हुए पहले एशियाई खेलों में छोटा सिंग ने सोना और सुरत सिंग माथुर ने कांस्य पदक जीता था।

बरवाल ने 5000 मीटर, 10000 मीटर और हाफ मैराथन दौड़ने के बाद इस साल मैराथन में डेब्यू किया था। अप्रैल में उन्होंने रॉटरडैम की एनएन मैराथन में शिवनाथ सिंह के 48 साल पुराने 2:11:58 के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा था।

सावन बरवाल 28 साल के लंबी दूरी के धावक हैं और हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर के रहने वाले हैं। वे भारतीय सेना में हवलदार हैं। पूरी मैराथन में उतरने से पहले बरवाल शॉर्ट ट्रैक स्पर्धाओं में हिस्सा लेते थे। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपने पहले ही मैराथन, रॉटरडैम मैराथन में 2:11:58 के समय के साथ रिकॉर्ड तोड़ा था, वह भी अपनी डेब्यू रेस में ही। 2024 में उन्होंने 5000 मीटर में राष्ट्रीय खिताब जीता था, और 2025 के राष्ट्रीय खेलों में 5000 मीटर व 10000 मीटर दोनों में सोना जीता था। लेकिन एशियाई खेलों में मिली यह उपलब्धि उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी है।

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