एम्स नागपुर में रोगी सुरक्षा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, AI युग में इलाज सुरक्षित बनाने पर मंथन
एम्स नागपुर में राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन-2026 में देशभर के डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण इलाज पर चर्चा की।
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अस्पतालों में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है, और ऐसे में मरीज की सुरक्षा को लेकर सतर्कता पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। इलाज के दौरान हुई एक छोटी-सी गलती भी मरीज की सेहत पर भारी पड़ सकती है। यही सोचकर एम्स नागपुर में दो दिन का राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन-2026 आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से डॉक्टर, नर्सिंग एक्सपर्ट, अस्पताल चलाने वाले प्रशासक और रिसर्चर पहुंचे। छह एम्स के निदेशक भी इसमें शामिल हुए। सबने मिलकर इस बात पर बात की कि अस्पतालों में मरीज को सुरक्षित और अच्छी सेवा कैसे दी जाए, और अपने-अपने अस्पतालों में जो अच्छे तरीके अपनाए जा रहे हैं, उनका अनुभव भी एक-दूसरे से साझा किया।
सम्मेलन का उद्घाटन राज्यसभा सांसद और इंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियन्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे ने किया। इस मौके पर पूर्व सांसद अजय संचेती विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की अपर महानिदेशक डॉ. सुजाता चौधरी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
एम्स नागपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि आज के दौर में मरीज की सुरक्षा किसी भी अच्छी स्वास्थ्य सेवा की सबसे बड़ी बुनियाद है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मेडिकल तकनीक आगे बढ़ रही है, इलाज के तरीकों को और सुरक्षित और असरदार बनाना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों में नवजात बच्चों और छोटे बच्चों की देखभाल, इमरजेंसी सेवाओं, रोगी सुरक्षा में लीडरशिप, तकनीक और AI, और रिसर्च व इनोवेशन जैसे विषयों पर एक्सपर्ट्स ने अपनी बात रखी। इसके अलावा सर्जरी के दौरान सुरक्षा और दवाइयों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी लंबी चर्चा हुई। एक्सपर्ट्स ने इलाज के हर स्टेज पर हो सकने वाले खतरों को पहचानने और उन्हें कम करने के तरीकों पर अपना-अपना तजुर्बा बांटा।
अस्पतालों में इंफेक्शन कैसे रोका जाए, इस पर भी बातचीत हुई। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि रोगी सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग जरूर होनी चाहिए, ताकि उन घटनाओं से सीखकर आगे ऐसी गलतियां दोबारा न हों। एक्सपर्ट्स का कहना था कि मरीज की सुरक्षा सिर्फ डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे हेल्थ सिस्टम की साझा जिम्मेदारी है।
सम्मेलन में इलाज के दौरान मरीज और उनके परिवार वालों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इस पर चर्चा हुई कि मरीज और उनके परिजनों को इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी कैसे दी जाए, उनकी चिंताओं को कैसे समझा जाए और इलाज से जुड़े फैसलों में उन्हें भी शामिल कैसे किया जाए।
एक्सपर्ट्स का मानना था कि तकनीक और AI से इलाज बेहतर हो सकता है, लेकिन इसके साथ मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता और इंसानी नजरिए को हमेशा प्राथमिकता में रखना होगा। नागपुर में हुए इस सम्मेलन ने देशभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स को इन मुद्दों पर बात करने के लिए एक साझा मंच दिया।