एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार जरूरी करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रिफिल बुकिंग के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (BAA) जरूरी करने के केंद्र सरकार के फैसले पर अब अदालत में सवाल उठा है। इस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से उसका पक्ष बताने को कहा है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने हुई। बेंच ने केंद्र सरकार के वकीलों से कहा कि वे इस मामले में निर्देश लेकर अगली सुनवाई में सरकार का रुख साफ करें।
सुनवाई के दौरान बेंच ने यह बात भी उठाई कि देश में हर व्यक्ति के पास आधार कार्ड नहीं है। इससे घरेलू एलपीजी इस्तेमाल करने वाले ऐसे ग्राहकों की हालत को लेकर सवाल खड़ा होता है।
यह जनहित याचिका वकील पुलकित लूथरा ने दायर की है। याचिका में बताया गया है कि वे 75 फीसदी स्थायी रूप से दृष्टिबाधित हैं। याचिका का दावा है कि अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया दृष्टिबाधित लोगों समेत कुछ दिव्यांग और शारीरिक दिक्कत वाले ग्राहकों के लिए बड़ी मुश्किल बन सकती है।
याचिका में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 17 सितंबर के उस पत्र को चुनौती दी गई है, जो मंत्रालय ने इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को भेजा था। इसके साथ 19 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज को भी चुनौती दी गई है। याचिका के मुताबिक इस फैसले से जुड़ी एक व्यवस्था है कि जो ग्राहक बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं करेंगे, उनकी एलपीजी रिफिल पर असर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक इस फैसले से करीब 3.16 करोड़ एलपीजी ग्राहक प्रभावित हो सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि यह प्रक्रिया आधार अधिनियम, 2016 में दी गई इजाजत की सीमा से आगे जाती है, और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अधिकारों का उल्लंघन होता है।
याचिका की दलील है कि प्रमाणीकरण पूरा न होने के पीछे कई बार ग्राहक की मर्जी नहीं, बल्कि उसके बस के बाहर की वजहें होती हैं। बुजुर्गों, दिव्यांग ग्राहकों और उम्र या शारीरिक सीमाओं की वजह से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में दिक्कत झेलने वालों के लिए इस व्यवस्था में पर्याप्त वैकल्पिक इंतजाम नहीं है, ऐसा याचिका में कहा गया है।
याचिका के दावे के अनुसार, जो ग्राहक बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराना नहीं चाहते या नहीं करा सकते, उनके 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। ऐसे ग्राहकों को उपलब्धता के हिसाब से 5 किलो या 10 किलो का सिलेंडर बाजार भाव पर खरीदने का विकल्प दिया जा सकता है। इससे सब्सिडी और नियंत्रित खुदरा दर पर एलपीजी मिलने की व्यवस्था को लेकर ग्राहकों में चिंता है।
अब नजर इस पर है कि अगली सुनवाई में केंद्र सरकार इस नियम पर क्या रुख रखती है। फिलहाल अदालत ने याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। एलपीजी ग्राहकों पर असल असर क्या होगा और आगे की प्रक्रिया क्या रहेगी, यह अदालती सुनवाई और केंद्र के रुख के बाद ही साफ होगा।