मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

एलपीजी कनेक्शन में 62 लाख की गिरावट, ई-केवाईसी और सप्लाई क्राइसिस दोनों वजह

देश में घरेलू एलपीजी ग्राहकों की तादाद अप्रैल से अगस्त के बीच 62 लाख घट गई है, तेल मंत्रालय के आंकड़ों में यह सामने आया है।

एलपीजी कनेक्शन में 62 लाख की गिरावट, ई-केवाईसी और सप्लाई क्राइसिस दोनों वजह
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अगर आपका भी गैस सिलिंडर कनेक्शन अचानक बंद हो गया है तो आप अकेले नहीं हैं। तेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच देश में घरेलू एलपीजी ग्राहकों की संख्या में 62 लाख की गिरावट दर्ज हुई है। अप्रैल की शुरुआत में सक्रिय घरेलू एलपीजी ग्राहक 33.39 करोड़ थे, जो सितंबर की शुरुआत तक घटकर 32.77 करोड़ रह गए।

गौर करने वाली बात यह है कि एलपीजी ग्राहकों की संख्या में यह गिरावट लंबे अरसे बाद देखने को मिली है। 2015-16 की शुरुआत में देश में करीब 14.86 करोड़ सक्रिय एलपीजी ग्राहक थे। इसके बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया और 2027 की शुरुआत तक 33.39 करोड़ पर पहुंच गया, यानी ग्राहकों की तादाद दोगुने से भी ज्यादा हो गई थी। लेकिन 2027 में पूरी तस्वीर बदल गई। अप्रैल से अगस्त के बीच सक्रिय ग्राहकों की संख्या में 1 फीसदी की गिरावट आई और सितंबर की शुरुआत तक यह आंकड़ा 32.77 करोड़ तक फिसल गया।

इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं है। पश्चिम एशिया में चल रही जंग का असर एलपीजी सप्लाई पर पड़ा है, जिससे भारत की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। जंग से पहले भारत की 90 फीसदी एलपीजी इंपोर्ट खाड़ी देशों से होती थी। सप्लाई पर बढ़ते दबाव की वजह से तेल कंपनियों ने नए एलपीजी कनेक्शन देने कम कर दिए हैं।

ई-केवाईसी का भी इसमें रोल है। एलपीजी कनेक्शन वेरिफाई करने के लिए आधार बेस्ड बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन इस्तेमाल हो रहा है। सरकार के मुताबिक 19 सितंबर तक 27.43 करोड़ यानी 89.9 फीसदी सक्रिय घरेलू एलपीजी ग्राहकों ने अपना बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन पूरा कर लिया था। जिन्होंने अभी तक यह नहीं कराया, उन्हें दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। इसलिए गैस कनेक्शन और सप्लाई पर इसका भी कुछ असर पड़ा है, ऐसा कहा जा सकता है। इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से कंट्रोल्ड रेट पर सब्सिडी वाला एलपीजी रिफिल बुक कराने के लिए यह ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। इसका असर उज्ज्वला योजना पर भी पड़ा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत ग्राहकों की संख्या अब करीब 6 लाख घटकर सिर्फ 10.57 करोड़ रह गई है।

वित्त वर्ष 2025 में भारत की एलपीजी खपत करीब 3.13 करोड़ टन थी, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन था। इस वजह से मांग और घरेलू उत्पादन के बीच का फासला इंपोर्ट से पूरा करना पड़ रहा है।

लोग एलपीजी कनेक्शन छोड़कर पीएनजी की तरफ भी शिफ्ट हो रहे हैं। जिन इलाकों में पीएनजी उपलब्ध है, वहां सरकार और गैस कंपनियां लोगों को एलपीजी से पाइप गैस की तरफ मोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इस वित्त वर्ष के जुलाई तक करीब 6 लाख नए पीएनजी ग्राहक जुड़े, जिससे पीएनजी ग्राहकों की कुल संख्या 1.75 करोड़ हो गई। हालांकि एलपीजी ग्राहकों में हुई 62 लाख की गिरावट में से पीएनजी की तरफ हुआ यह शिफ्ट सिर्फ एक-छठा हिस्सा है।

मार्च के आखिर से सितंबर की शुरुआत तक साउथ इंडिया में एलपीजी ग्राहकों में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जो करीब 26.3 लाख रही। इसके बाद वेस्ट इंडिया में 16.2 लाख और नॉर्थ इंडिया में 15 लाख ग्राहकों की गिरावट दर्ज हुई। ईस्ट इंडिया में भी 3.4 लाख ग्राहक घटे। बावजूद इसके नॉर्थ इंडिया में अभी भी एलपीजी ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा है। सितंबर की शुरुआत में नॉर्थ इंडिया में करीब 9.93 करोड़, साउथ इंडिया में 7.98 करोड़, वेस्ट इंडिया में 6.83 करोड़ और ईस्ट इंडिया में 6.75 करोड़ एलपीजी ग्राहक थे।

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