गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:33 IST

DUSU चुनाव: उम्मीदवारी के लिए हाईकोर्ट ने बताए नियम, खर्च की लिमिट भी तय

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी DUSU के चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए लिंगदोह कमेटी के नियम लागू होते हैं, जिनमें हाजिरी और खर्च की लिमिट अहम शर्तें हैं।

DUSU चुनाव: उम्मीदवारी के लिए हाईकोर्ट ने बताए नियम, खर्च की लिमिट भी तय
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी DUSU का चुनाव हर साल कैंपस में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनता है। पोस्टर लगने लगते हैं, रैलियां निकलती हैं और नारेबाजी शुरू हो जाती है। इस माहौल में स्टूडेंट्स के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या कोई भी आम स्टूडेंट इस चुनाव में उम्मीदवार बनकर खड़ा हो सकता है, या इसके लिए कुछ खास शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। असल में DUSU के चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर होते हैं, और उम्मीदवार बनने के लिए कुछ तय नियमों को पूरा करना जरूरी है।

सबसे पहली शर्त उम्र की है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक उम्मीदवार बनने के लिए उम्र की एक तय लिमिट रखी गई है, और ग्रेजुएशन तथा पोस्टग्रेजुएशन कोर्स के स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग उम्र के मानक लागू होते हैं।

सिर्फ उम्र ही नहीं, क्लास में हाजिरी भी उम्मीदवार बनने के लिए बड़ी शर्त मानी जाती है। लिंगदोह कमेटी के मुताबिक चुनाव लड़ने वाले स्टूडेंट की अटेंडेंस कम से कम ७५ परसेंट होनी चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी हाल ही में इस नियम पर मोहर लगाते हुए साफ किया था कि जिस स्टूडेंट की हाजिरी इस लिमिट से कम होगी, उसका फॉर्म कॉलेज प्रशासन खारिज कर सकता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है कि चुनाव लड़ने वाले स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर न पड़े।

उम्मीदवार बनने के लिए स्टूडेंट का शैक्षणिक और अनुशासन का रिकॉर्ड भी साफ होना चाहिए। इसमें यह शर्त है कि स्टूडेंट के पिछले किसी भी सेमेस्टर या साल में कोई एकेडमिक बैकलॉग नहीं होना चाहिए। जिस स्टूडेंट के खिलाफ कॉलेज, यूनिवर्सिटी या पुलिस लेवल पर कोई कार्रवाई या केस दर्ज हो, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। यानी सिर्फ वही स्टूडेंट्स चुनाव में उतर सकते हैं जिनका पढ़ाई और अनुशासन दोनों का रिकॉर्ड क्लीन हो।

चुनाव में वोट देने और उम्मीदवार बनने के लिए स्टूडेंट का अपने कॉलेज, डिपार्टमेंट या इंस्टीट्यूट में एक तय तारीख तक एडमिशन लिया होना जरूरी है। यूनिवर्सिटी के इलेक्शन अफसर हर साल एक कट-ऑफ तारीख और टाइम तय करते हैं, और उसके बाद एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स उस साल के चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते। जिन फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स का आईडी कार्ड अभी नहीं बना है, उनके लिए फीस रिसीट और बोनाफाइड सर्टिफिकेट के आधार पर अलग व्यवस्था की जाती है।

चुनाव में खर्च और प्रचार के लिए भी नियम तय हैं। हर उम्मीदवार के लिए प्रचार में खर्च की अधिकतम लिमिट Rs ५,००० रखी गई है। प्रचार का टाइम सिर्फ सुबह ८ बजे से रात ८ बजे तक ही तय किया गया है। इसके अलावा हर उम्मीदवार के साथ सीमित संख्या में ही स्टूडेंट्स प्रचार में शामिल हो सकते हैं।

इन सारे नियमों का मकसद यही है कि कैंपस की चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी रहे और इसका पढ़ाई पर कोई नेगेटिव असर न पड़े। कुल मिलाकर बात यह है कि कोई भी आम स्टूडेंट DUSU का चुनाव लड़ सकता है, बस शर्त यह है कि उसे उम्र, हाजिरी, एकेडमिक रिकॉर्ड और एडमिशन से जुड़ी ये सारी शर्तें पूरी करनी होंगी।

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