मंगलवार, 3 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

DILRMP 3.0: अब हर जमीन को मिलेगा भू-आधार नंबर, केंद्र सरकार लाई नई गाइडलाइन

DILRMP 3.0: अब हर जमीन को मिलेगा भू-आधार नंबर, केंद्र सरकार लाई नई गाइडलाइन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

केंद्र सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए DILRMP 3.0 की नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें हर प्लॉट को 14 अंकों का यूनीक नंबर मिलेगा।

अगर आपके खेत, प्लॉट या घर को एक ऐसा खास नंबर मिल जाए, जिससे उसकी रजिस्ट्री, नक्शा और मालिकाना हक की सारी जानकारी एक ही डिजिटल सिस्टम में मिल जाए, तो जमीन से जुड़े कई काम आसान हो जाएंगे। केंद्र सरकार अब इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। नई व्यवस्था के तहत देश की हर जमीन के टुकड़े को 14 अंकों का यूनीक नंबर दिया जाएगा, जिसे भू-आधार या यूएलपिन यानी यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर कहा जाएगा।

केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम यानी DILRMP 3.0 के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। यह योजना 2026 से 2031 तक चलेगी और इसके लिए करीब 565.5 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। सरकार का मकसद सिर्फ पुराने कागजातों को कंप्यूटर में डालना नहीं है, बल्कि जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्री और मालिकाना हक की जानकारी को आपस में जोड़ना है। इससे आगे चलकर जमीन खरीदने-बेचने और रिकॉर्ड देखने का काम पहले से आसान हो सकता है।

DILRMP 3.0 के तहत हर प्लॉट को 14 अंकों का यूएलपिन नंबर दिया जाएगा, जो उस जमीन की डिजिटल पहचान बनेगा। यह नंबर जमीन के रिकॉर्ड और नक्शों को आपस में जोड़ेगा, और नक्शों को उनकी असली भौगोलिक लोकेशन से भी जोड़ा जाएगा। इससे प्लॉट की पहचान, उसकी सीमा और उपलब्ध रिकॉर्ड चेक करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपके पुराने कागजात बेकार हो जाएंगे। पुरानी रजिस्टर बुक, जमीन के दस्तावेज और रिकॉर्ड संभालकर रखना अब भी जरूरी रहेगा, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड को जमीन के मालिकाना हक का आखिरी कानूनी सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

सरकार पुराने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रखने पर भी जोर दे रही है। पुराने कागजात और रजिस्ट्री रिकॉर्ड को स्कैन कर डिजिटल रूप में स्टोर किया जाएगा, यानी कई साल पुराने जमीन के दस्तावेज भी आगे चलकर डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकते हैं। इसके अलावा राज्यों में अलग-अलग जमीन का डेटा तैयार किया जाएगा, और इन सबको जोड़कर एक बड़ा राष्ट्रीय जमीन रिकॉर्ड सिस्टम बनाने पर काम होगा। इससे जमीन से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत कम हो सकती है।

जमीन रजिस्ट्री कराते वक्त लोगों को अक्सर लंबी लाइन और कई काउंटरों का सामना करना पड़ता है। इस दिक्कत को कम करने के लिए सरकार देश के 75 सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' में बदलने की योजना पर काम कर रही है। ये केंद्र ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल तरीके से जमीन से जुड़ी रजिस्ट्रेशन सेवाएं देंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का समय बचेगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।

डिजिटल रिकॉर्ड का सबसे ज्यादा फायदा जमीन खरीदने वालों और किसानों को मिल सकता है। जमीन का टुकड़ा खरीदने से पहले मालिकाना हक के रिकॉर्ड, नक्शे और उस जमीन की पहचान से जुड़ी जानकारी चेक करना आसान हो जाएगा। बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया में भी किसानों के लिए डिजिटल जमीन रिकॉर्ड काम आ सकते हैं, हालांकि लोन मंजूरी सिर्फ डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर नहीं होगी, बैंक के बाकी नियम और पात्रता की शर्तें भी लागू होंगी।

सरकार के मुताबिक DILRMP के पिछले चरणों में 99.9 प्रतिशत मालिकाना हक के रिकॉर्ड और 97 प्रतिशत भूमापन नक्शे डिजिटल किए जा चुके हैं। करीब 99 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों का भी कंप्यूटरीकरण हो चुका है। अब DILRMP 3.0 इन बिखरे हुए सिस्टम को आपस में जोड़ने पर फोकस करेगा। सरकार जमीन के रिकॉर्ड को ज्यादा सुरक्षित, आसानी से मिलने वाला और डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीन मालिकों के लिए अपनी पुरानी रजिस्टर बुक और असली कागजात संभालकर रखना ही सबसे जरूरी बात रहेगी।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे