चिपलूण के पास खेर्डी MIDC में फर्नीचर कारखाने को भीषण आग, करोडों का नुकसान
शॉर्ट सर्किट से आग लगने का शुरुआती अंदाज़ा, पंद्रह घंटे बाद पाया गया काबू
चिपळूण शहर के पास खेर्डी इंडस्ट्रियल एरिया में फर्निचर बनाने वाली इम्पेरियल ट्रेडर्स कंपनी के कारखाने में भीषण आग लग गई, जिसमें पूरा कारखाना जलकर खाक हो गया। आग बुझाने के लिए रातभर तीन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां लगी रहीं। गुरुवार सुबह पांच बजे आग पर काबू पाया गया था, लेकिन थोड़ी देर बाद वह फिर भड़क उठी। कुल मिलाकर करीब पंद्रह घंटे तक आग पर काबू पाने की कोशिशें चलती रहीं।
शुरुआती अंदाज़े के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। कारखाने में विदेश से मंगाई गई बारह मशीनें और बाकी सारा सामान जलकर राख हो गया। इस आग में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार निहाल मालाणी और सोहेल फज़लानी ने मिलकर पार्टनरशिप में साल 2021 में खेर्डी MIDC में इम्पेरियल ट्रेडर्स नाम से यह फर्निचर कारखाना शुरू किया था। यहां आठ से दस मजदूर काम करते थे। फर्निचर बनाने के लिए मालाणी ने करीब चार करोड़ रुपए खर्च करके बारह मशीनें विदेश से आयात की थीं। यहां घर में इस्तेमाल होने वाले हर तरह के फर्निचर बनाए जाते थे, और नामी कंपनियों का बना-बनाया फर्निचर भी बिक्री के लिए रखा जाता था। बुधवार रात करीब नौ बजे कंपनी बंद होने के बाद सारे मजदूर घर चले गए थे।
करीब साढ़े नौ से दस बजे के बीच कंपनी में आग लगने की खबर मालाणी-फज़लानी को मिली। इसके बाद चिपळूण नगर पालिका के साथ-साथ लोटे की फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया। गाड़ियां पहुंचने तक आग बढ़ती चली गई। मदद के लिए काफी लोग मौके पर जमा हो गए थे, लेकिन कंपनी के दोनों तरफ इमारतें होने की वजह से राहत कार्य में दिक्कतें आ रही थीं। तीन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की जा रही थी। रात एक बजे आग काबू में आई, लेकिन कारखाने में लकड़ी का सामान और बुरादा ज्यादा होने की वजह से आग बार-बार सुलगती रही।
गुरुवार सुबह पांच बजे तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की मदद से आग बुझाने की कोशिशें चलती रहीं, लेकिन सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास आग फिर भड़क उठी और आधा-जला सामान दोबारा जलने लगा। आखिरकार साढ़े दस बजे के करीब चिपळूण नगर पालिका और लोटे की फायर ब्रिगेड की मदद से आग पूरी तरह काबू में लाई गई। यह फर्निचर कंपनी पांच साल पहले शुरू हुई थी। कंपनी की इमारत की शेड के लिए भारी लोहे के बीम लगाए गए थे, लेकिन आग की तपिश से ये बीम भी गरम होकर मुड़ गए। लोहे के सामान को छोड़कर कारखाने में कुछ भी बचा नहीं था।