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01:23 IST

ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल फेल, हीथ्रो-गैटविक समेत 300 से ज्यादा फ्लाइट रद्द

ब्रिटेन की नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज की मुख्य सिस्टम में तकनीकी खराबी से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे, साइबर हमले की अफवाहें खारिज।

ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल फेल, हीथ्रो-गैटविक समेत 300 से ज्यादा फ्लाइट रद्द तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ब्रिटेन की हवाई सेवा में मंगलवार को एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हड़कंप मच गया। देश की मुख्य एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में अचानक आई खराबी के चलते 300 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं, जबकि सैकड़ों विमान घंटों लेट हो गए। इसका सबसे ज्यादा असर लंदन के हीथ्रो और गैटविक एयरपोर्ट पर देखने को मिला, जहां यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दरअसल, नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज यानी NATS की फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में मंगलवार दोपहर करीब 1:46 बजे तकनीकी दिक्कत आ गई थी। इस वजह से फ्लाइट्स की जानकारी और ट्रैफिक कंट्रोल के काम में लगातार रुकावट आने लगी। यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को तुरंत सख्त हवाई पाबंदियां लगानी पड़ीं। इंजीनियरों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद इस खराबी को ठीक कर दिया, लेकिन इसका असर अगले कई घंटों तक बना रहा और पूरा फ्लाइट शेड्यूल गड़बड़ा गया। NATS ने इस पूरे मामले के लिए माफी मांगी और सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया।

हीथ्रो एयरपोर्ट पर रोजाना करीब 1,300 फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं, जिनमें से 352 से ज्यादा फ्लाइट्स का शेड्यूल इस खराबी से गड़बड़ हो गया। वहीं गैटविक एयरपोर्ट पर करीब 850 फ्लाइट्स में से 281 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर 650 में से 249 फ्लाइट्स पर असर पड़ा, जबकि बर्मिंघम में 300 में से 101 फ्लाइट्स या तो लेट हुईं या रद्द करनी पड़ीं। लूटन, स्टैनस्टेड और स्कॉटलैंड के एडिनबरा एयरपोर्ट पर भी यही हाल रहा, जहां हजारों यात्री अपनी फ्लाइट का इंतजार करते रहे।

ब्रिटेन की इस तकनीकी दिक्कत का असर सिर्फ यूके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे यूरोप की हवाई सेवाओं पर इसका असर दिखा। आयरलैंड के डबलिन एयरपोर्ट के अलावा ग्लासगो, एबरडीन और बेलफास्ट से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स को भी भारी पाबंदियों का सामना करना पड़ा। यूरोपियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी यूरोकंट्रोल के मुताबिक, ब्रिटेन के हवाई क्षेत्र में एंट्री न मिलने से कई इंटरनेशनल फ्लाइट्स को उनके ओरिजिनल एयरपोर्ट पर ही रोक कर रखना पड़ा। कई फ्लाइट्स को आखिरी वक्त पर डायवर्ट करना पड़ा, जिससे एयरपोर्ट्स पर भारी भीड़ जमा हो गई और यात्रियों का पूरा ट्रैवल प्लान बिगड़ गया।

फ्लाइट्स के अचानक रुकने और कुछ पायलटों द्वारा यात्रियों को तकनीकी खराबी की जानकारी देने से यह अफवाह फैल गई कि यह कोई बड़ा साइबर अटैक हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा जोरों पर रही। हालांकि, NATS के प्रवक्ता ने इन सभी आशंकाओं और अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संस्था ने साफ किया कि यह दिक्कत सिर्फ फ्लाइट डेटा प्रोसेसिंग में आई आंतरिक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई थी और साइबर हमले का कोई सबूत नहीं मिला है।

इस पूरे झमेले से ब्रिटिश एयरवेज, इजीजेट और रायनएयर जैसी बड़ी एयरलाइन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। डेटा एनालिसिस कंपनी सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक, हीथ्रो और गैटविक के बीच चलने वाली करीब 90 फ्लाइट्स सीधे रद्द कर दी गईं। रायनएयर ने बताया कि उसकी 50 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हुई हैं, जिससे 65,000 से ज्यादा यात्रियों का सफर अटक गया। विमान और पायलट अलग-अलग जगहों पर फंस जाने के चलते एयरलाइन कंपनियों ने चेतावनी दी है कि हवाई सेवाएं पूरी तरह पटरी पर आने में अगले 24 से 48 घंटे लग सकते हैं।

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