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18:00 IST

BIS के नए नियम से सस्ते टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन गार्ड महंगे होंगे, 1 अप्रैल 2027 से लागू

केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए BIS रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया, जिससे सस्ते अनब्रांडेड ग्लास की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

BIS के नए नियम से सस्ते टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन गार्ड महंगे होंगे, 1 अप्रैल 2027 से लागू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक जरूरी खबर है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। IS 19348:2025 नाम के इस भारतीय मानक के तहत 1 अप्रैल 2027 से बिना सर्टिफिकेशन वाले स्क्रीन गार्ड की बिक्री पर रोक लगेगी। इसका सीधा असर उन टेम्पर्ड ग्लास पर पड़ेगा जो अभी बाजार में 50 से 100 रुपये में आसानी से मिल जाते हैं, आगे चलकर इनके दाम बढ़ सकते हैं।

इसकी पहली वजह है टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का खर्च। अभी तक बाजार में मिलने वाले कई सस्ते स्क्रीन प्रोटेक्टर बिना सख्त क्वालिटी जांच के बनाए जाते हैं, ऐसा कहा जाता है। नए नियमों के बाद मैन्युफैक्चरर और इम्पोर्टर को जरूरी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना होगा। ग्लास की मोटाई, मजबूती, ऑप्टिकल क्लैरिटी जैसी चीजें जांचने के लिए मान्यता प्राप्त लैब का खर्च आएगा, साथ ही फैक्ट्री ऑडिट और रेगुलेटरी प्रोसेस का खर्च भी अंतिम कीमत में जुड़ सकता है।

दूसरी वजह कच्चे माल की क्वालिटी है। सस्ते स्क्रीन गार्ड में कम दर्जे का ग्लास इस्तेमाल होता है, ऐसा बताया जाता है। लेकिन मजबूती और इम्पैक्ट टेस्ट के नए मानक पूरे करने के लिए मैन्युफैक्चरर को बेहतर क्वालिटी का टेम्पर्ड या केमिकली स्ट्रेंथन्ड ग्लास इस्तेमाल करना पड़ सकता है, खासकर एल्युमिनोसिलिकेट जैसा हाई-क्वालिटी ग्लास इस्तेमाल होने से रॉ मटेरियल का खर्च बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर बिक्री कीमत पर होगा।

तीसरी वजह ऑप्टिकल क्लैरिटी और स्पेशल कोटिंग है। स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाने के बाद फोन की डिस्प्ले की ब्राइटनेस, कलर और टच रिस्पॉन्स पर असर न पड़े, इसके लिए बेहतर ऑप्टिकल क्लैरिटी वाला ग्लास चाहिए होता है। इसके अलावा एंटी-शैटर लेयर और फिंगरप्रिंट कम करने वाली ओलियोफोबिक कोटिंग जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होने से भी उत्पादन खर्च बढ़ सकता है।

चौथी वजह पैकेजिंग और ट्रेसेबिलिटी है। नए नियमों में पैकेजिंग पर मैन्युफैक्चरर की जानकारी, रजिस्ट्रेशन नंबर, बैच से जुड़ी डिटेल और मानक की जानकारी देना जरूरी हो सकता है, जिससे साधारण पैकिंग में बिकने वाले प्रोडक्ट के मुकाबले अतिरिक्त खर्च आएगा। इसका असर खासकर रोड किनारे या छोटी दुकानों में सस्ते दाम में मिलने वाले अनब्रांडेड स्क्रीन गार्ड पर पड़ सकता है।

पांचवीं वजह सस्ते इम्पोर्ट पर असर और लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा है। भारत के स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार में बड़ी मात्रा में सस्ते इम्पोर्टेड प्रोडक्ट इस्तेमाल होते हैं। BIS सर्टिफिकेशन के नियमों से इम्पोर्टर को क्वालिटी और सर्टिफिकेशन से जुड़ी प्रोसेस पूरी करनी होगी, जिससे घटिया या बिना सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट की बिक्री पर लगाम लग सकती है। साथ ही देश में लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन सर्टिफाइड प्रोडक्ट के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी, टेस्टिंग, कच्चा माल और पैकेजिंग की वजह से शुरुआती प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने की आशंका है।

ग्राहकों की जेब पर कितना असर होगा, इसका अंदाजा दिए गए आंकड़ों से लगाया जा सकता है। रोड किनारे मिलने वाले अनब्रांडेड ग्लास की कीमत अभी 50 से 100 रुपये है, जो 1 अप्रैल 2027 के बाद 150 से 250 रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है, यहां घटिया ग्लास की जगह सर्टिफाइड बेसिक ग्लास आएगा। मिड-रेंज स्क्रीन गार्ड अभी 200 से 300 रुपये के मिलते हैं, जो बढ़कर 350 से 500 रुपये हो सकते हैं, इनकी क्वालिटी सुधरेगी और इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट और टच की सही गारंटी मिलेगी। प्रीमियम ब्रांडेड ग्लास अभी 700 से 1500 रुपये या उससे ज्यादा में मिलते हैं, इनकी कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं होगा क्योंकि ये पहले से ही इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से बनते हैं, इसलिए इन पर असर कम होगा।

कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2027 से BIS मानकों का पालन न करने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर की बिक्री पर असर पड़ेगा, जिससे अभी 50 से 100 रुपये में मिलने वाले सस्ते टेम्पर्ड ग्लास की कीमतें आगे बढ़ सकती हैं। हालांकि ग्राहक को वास्तव में कितनी अतिरिक्त कीमत चुकानी होगी, यह मैन्युफैक्चरर, सर्टिफिकेशन खर्च, कच्चे माल की कीमत और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा। आगे चलकर स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार में सस्ते अनब्रांडेड ग्लास की जगह सर्टिफाइड और बेहतर क्वालिटी वाले प्रोडक्ट का चलन बढ़ने की संभावना है।

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