भारत में हर तीसरा अनमैरिड जवान अकेलापन महसूस करता है, मैच ग्रुप के सर्वे में दावा
मैच ग्रुप के लिए इप्सॉस ने किए सर्वे में सामने आया कि डिजिटल कनेक्शन होने के बावजूद भारत के अनमैरिड जवान अकेलेपन से जूझ रहे हैं, फिर भी रिश्तों की तलाश जारी है।
पूरे एशिया में मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से अनमैरिड जवानों को मतलब का रिश्ता ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है। भारत में दिक्कत लोगों तक पहुंचने की या पहचान बनाने की नहीं है, बल्कि भागदौड़ भरी और डिजिटल तरीके से जुड़ी इस दुनिया में सच्चा और मतलब का रिश्ता ढूंढना ही असली चैलेंज बन गया है।
भारत के जवान आज भी सोशल और रोमांटिक रिश्तों की तलाश में हैं, फिर भी काम का तनाव, थकान और ऑनलाइन बातचीत तथा असली जिंदगी के रिश्तों के बीच बढ़ते फासले की वजह से दिल से अपनापन महसूस करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है।
इंसानों के बीच रिश्तों की इस बदलती शक्ल को ठीक से समझने के लिए मैच ग्रुप ने इप्सॉस को यह जिम्मा दिया था कि वह भारत के जवान अनमैरिड लोगों से पूछे कि उन्हें अकेलापन, सोशल रिश्ते, रिश्ता-नाता और डेटिंग को लेकर कैसा अनुभव होता है। इस स्टडी में एक अजीब बात सामने आई है, भारत के जवान रिश्ते बनाने की भरपूर कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन लोगों के साथ रहना और डिजिटल तरीके से कनेक्टेड होना अकेलापन कम होने की गारंटी नहीं है। बहुतों के लिए अब नई-नई तरीकों से लोगों से मिलना और कम मगर मजबूत और मतलब के रिश्ते बनाना ही जरूरत बन गई है।
भारत में 18 से 45 साल के 1,000 अनमैरिड लोगों पर हुए मैच ग्रुप ह्युमन कनेक्शन सर्वे में सामने आया कि भारत के 35 फीसदी अनमैरिड लोगों को बार-बार या हमेशा अकेलापन महसूस होता है, वहीं 70 फीसदी लोग नए सोशल रिश्ते बनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं और 75 फीसदी लोग हफ्ते में एक से ज्यादा बार आमने-सामने मिलकर बात करते हैं। इससे यह साफ होता है कि यह अकेलापन रिश्ता बनाने की इच्छा या मौका न होने की वजह से नहीं, बल्कि आज की जिंदगी में बढ़ते तनाव की वजह से है।
सर्वे बताता है कि भारत के 64 फीसदी अनमैरिड लोग सोशल लाइफ से ज्यादा काम या पढ़ाई को तवज्जो देते हैं, वहीं 55 फीसदी लोग कहते हैं कि रोज के काम के बाद वे इतने थक जाते हैं कि लोगों से मिलना-जुलना या बातचीत करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा आधे से ज्यादा, यानी 58 फीसदी लोगों का कहना है कि वे ऑनलाइन तो लोगों से कनेक्टेड रहते हैं, लेकिन असली जिंदगी में उन्हें अकेलापन महसूस होता है। इससे डिजिटल दुनिया में कनेक्टेड रहने और असली जिंदगी में मतलब का इंसानी रिश्ता महसूस करने के बीच का फासला दिखता है।
इतनी दिक्कतों के बावजूद रिश्ता बनाने की चाहत कम नहीं हुई है। भारत के 72 फीसदी अनमैरिड लोग ज्यादा रिश्ते बनाने की बजाय मजबूत रिश्ते बनाना पसंद करते हैं, वहीं 70 फीसदी लोग नए सोशल रिश्ते बनाने की कोशिश में लगे हैं। इससे साफ है कि भारत के जवान रिश्तों से दूर नहीं भाग रहे, बल्कि जो रिश्ता चाहिए उस पर सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं।
यह चाहत रोमांटिक रिश्तों तक भी फैली हुई है। 78 फीसदी लोगों को सच्चे प्यार पर भरोसा है और 77 फीसदी को यकीन है कि आखिरकार उन्हें अपने लिए सही इंसान मिल ही जाएगा। साथ ही 85 फीसदी लोग कहते हैं कि वे लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते की तलाश में हैं, और जेन जी में यह आंकड़ा 89 फीसदी है।
63 फीसदी लोग किसी गलत पार्टनर के साथ समझौता करके रहने की बजाय तलाश जारी रखना पसंद करेंगे, वहीं 72 फीसदी लोग कहते हैं कि वे उन्हीं लोगों से डेटिंग करेंगे जिनके साथ लंबा भविष्य दिखता हो। मैच ग्रुप में इंडिया और मिडल ईस्ट के रीजनल हेड और सीनियर डायरेक्टर अनुकुल कुमार ने कहा, "भारत के जवानों को पता है उन्हें कैसा रिश्ता चाहिए। इस स्टडी से पता चला कि भारत के 35 फीसदी अनमैरिड लोगों को बार-बार या हमेशा अकेलापन महसूस होता है, फिर भी 70 फीसदी लोग नए सोशल रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे हैं और 72 फीसदी कम मगर मजबूत रिश्तों को तवज्जो दे रहे हैं। इससे साफ है कि बिजी लाइफस्टाइल और डिजिटल बातचीत की वजह से असली रिश्ता बनाना मुश्किल जरूर हो गया है, लेकिन मतलब के रिश्ते की चाहत अब भी बनी हुई है। टेक्नोलॉजी लोगों को सच्चा, सही और मतलब का रिश्ता ढूंढने में बड़ा रोल निभा सकती है।"
अभी भारत में 40 फीसदी अनमैरिड लोग डेटिंग ऐप यूज कर रहे हैं, वहीं 63 फीसदी कहते हैं कि डेटिंग ऐप से उन्हें दूसरों से कनेक्टेड महसूस होता है और अकेलापन कम होता है। आधे से ज्यादा, यानी 55 फीसदी लोगों का कहना है कि अगले 12 महीनों में वे डेटिंग ऐप यूज करने की सोच रहे हैं, वहीं 60 फीसदी लोग बताते हैं कि उनका ऑनलाइन डेटिंग का अनुभव अच्छा रहा है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन कनेक्ट होने में लोग भरोसे को सबसे ज्यादा तवज्जो देते हैं। भारत के 60 फीसदी अनमैरिड लोग कहते हैं कि ऑनलाइन डेटिंग करते समय वे सेफ्टी और इंक्लूसिविटी का ख्याल रखते हैं, वहीं 52 फीसदी लोगों के लिए डेटिंग ऐप चुनते समय वेरिफाइड प्रोफाइल और मजबूत सिक्योरिटी सबसे जरूरी बात होती है।
इप्सॉस ने यह मैच ग्रुप ह्युमन कनेक्शन सर्वे भारत के अलावा जापान, साउथ कोरिया और थाईलैंड में भी किया, ताकि जवान अनमैरिड लोगों के अकेलेपन, सोशल रिश्तों, रिश्ता-नाता और डेटिंग के अनुभव को समझा जा सके। भारत में इस सर्वे में बड़े महानगरों और फर्स्ट टियर शहरों के 18 से 45 साल के 1,000 अनमैरिड लोगों को शामिल किया गया था।