बागेश्वर धाम के पर्चे में पुत्र योग का दावा गलत निकला, चौथी बेटी होने पर पिता को समझाया गया
झांसी के एक पिता को बागेश्वर धाम से मिले पर्चे में पुत्र योग होने की बात लिखी थी, लेकिन चौथी संतान बेटी हुई। अंनिस की काउंसलिंग के बाद पिता का रुख बदल गया।
झांसी के एक परिवार में चौथी बार भी बेटी ने जन्म लिया, जबकि बागेश्वर धाम से मिले पर्चे में पुत्र योग होने का दावा किया गया था। इस घटना के बाद अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति यानी अंनिस सामने आई और पीड़ित पिता की काउंसलिंग की।
अंनिस को दी गई जानकारी के मुताबिक वह व्यक्ति अपनी पत्नी की कथित प्रेत बाधा दूर कराने के लिए बागेश्वर धाम गया था। वहां उसे जो पर्चा दिया गया, उस पर कथित तौर पर पुत्र योग लिखा हुआ था। इसी पर्चे को पढ़कर उसे पूरा भरोसा हो गया था कि अगली बार बेटा ही होगा।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पर्चे में पुत्र योग लिखा होने के बावजूद जब चौथी संतान के रूप में बेटी हुई, तो पीड़ित पिता हैरान रह गया। वह अपनी बात रखने और जवाब मांगने के लिए बागेश्वर धाम के दरबार में भी गया, लेकिन वहां से यही जवाब मिला कि भक्ति या नियम में उसी की तरफ से कोई कमी रह गई होगी।
शुरुआत में पिता बेहद गुस्से में था, लेकिन बाद में उसे यह समझ आया कि इस पूरी बात और उसकी नाराजगी का उस मासूम बच्ची से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद उसने अंनिस से संपर्क किया, जहां समिति के पदाधिकारियों ने उसके साथ बैठकर बात की और काउंसलिंग की।
इस बातचीत के दौरान पिता ने खुद माना कि बेटे की चाहत में अपनी नवजात बेटी से नाराज होना पूरी तरह गलत था। उसने कहा कि उनकी बेटी उन्हें बहुत प्यारी है और वे उसे अच्छी शिक्षा, सही संस्कार और खुशहाल जिंदगी देने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे। फिलहाल यह बच्ची करीब 4 महीने की है। इस पूरे मामले में पिता और अंनिस के पदाधिकारियों के बीच हुई बातचीत की एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रही है।
पिता ने अंनिस के जरिए लोगों से अपील की है कि किसी भी दैवीय शक्ति या भविष्यवाणी के दावे पर बिना सोचे-समझे भरोसा न करें, बल्कि अपनी समझ का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि जो धोखा उनके साथ हुआ, वैसा किसी और के साथ न हो, इसीलिए वे अपनी बात सबके सामने रख रहे हैं।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने बच्ची के मां-बाप के इस फैसले का स्वागत किया और उनका अभिनंदन करते हुए बच्ची को शुभकामनाएं दीं। समिति ने कहा कि हर बच्चे को बराबर प्यार, शिक्षा और सम्मान पाने का पूरा हक है।