बच्चों की सुरक्षा के लिए मिसिंग लिंक ट्रस्ट का AI चैटबॉट, मुंबई के 100 पालिका स्कूलों में पहल
कैपजेमिनी इंडिया के साथ मिलकर मिसिंग लिंक ट्रस्ट ने व्हॉट्सऐप पर चलने वाला 'खुली बात' चैटबॉट शुरू किया, मुंबई के महानगरपालिका के 100 स्कूलों में चल रहा है काम।
बच्चों की सुरक्षा की शुरुआत खुलकर बातचीत करने से होती है, यह बात मिसिंग लिंक ट्रस्ट (एमएलटी) ने अपने नए चैटबॉट के लॉन्च पर दोहराई है। एनसीआरबी की 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पॉक्सो कानून के तहत 69,191 मामले दर्ज हुए, और इनमें से 96 फीसदी से ज्यादा मामलों में आरोपी कोई अनजान व्यक्ति नहीं बल्कि बच्चे के करीबी जानकार ही निकले।
इसी वजह से बच्चों और किशोरों को पर्सनल सीमाएं, सहमति और सुरक्षित रिश्तों के बारे में समझाना जरूरी है, ताकि वे असहज करने वाली परिस्थिति पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर सही तरीके से मदद मांग सकें। साथ ही पैरेंट्स, टीचर्स और केयरगिवर्स के पास भी बच्चों की बात सुनने, सही रिस्पॉन्स देने और उन्हें सपोर्ट करने के लिए जरूरी जानकारी होनी चाहिए।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मिसिंग लिंक ट्रस्ट ने कैपजेमिनी इंडिया के साथ मिलकर 'खुली बात' नाम का AI-बेस्ड और व्हॉट्सऐप पर चलने वाला चाइल्ड सेफ्टी चैटबॉट लॉन्च किया है। 'खुली बात' यानी खुलकर की गई बातचीत। यह चैटबॉट पैरेंट्स और केयरगिवर्स को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी और गाइडेंस आसानी से देने के लिए बनाया गया है। अपनी देखरेख में मौजूद बच्चों से पर्सनल सीमाएं, सहमति, रिश्ते, ऑनलाइन सेफ्टी और शोषण जैसे विषयों पर बात कैसे करें, इसमें बड़ों को इस चैटबॉट के जरिए मदद मिलती है। जरूरत पड़ने पर सही मदद और जरूरी साधनों की जानकारी भी यहां से मिलती है। कोई भी बड़ा व्हॉट्सऐप नंबर 6003060040 पर 'Hi' मैसेज भेजकर इस चैटबॉट से बातचीत शुरू कर सकता है।
इस चैटबॉट का अनावरण महाराष्ट्र सरकार के माहिती व जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह, आईपीएस, और अन्य लोगों ने किया। मिसिंग लिंक ट्रस्ट मुंबई महानगरपालिका के 100 स्कूलों में बच्चों पर होने वाले अत्याचार रोकने के लिए काम कर रहा है। इस पार्टनरशिप के तहत तीन क्षेत्रों में काम हो रहा है, स्कूलों में प्रोग्राम के जरिए 10,000 किशोर लड़के-लड़कियों को सेफ्टी एजुकेशन देना, पैरेंट्स, टीचर्स और केयरगिवर्स के लिए 'खुली बात' AI चैटबॉट तैयार करना, और अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स की मीटिंग्स व चर्चाओं के जरिए बच्चों पर होने वाले यौन शोषण को रोकने और उस पर सही रिस्पॉन्स देने का सिस्टम मजबूत करना।
मिसिंग लिंक ट्रस्ट की फाउंडर ट्रस्टी और सीईओ लीना केजरीवाल ने कहा, "खुली बात में AI मॉडल के जरिए सिर्फ आम सलाह नहीं दी जाती। पिछले 10 से ज्यादा सालों से फील्ड में हमने जो काम किया है, उसी अनुभव के आधार पर यह चैटबॉट बनाया गया है। इसलिए इससे मिलने वाली गाइडेंस लोकल स्तर के असली खतरों पर आधारित है और भारतीय परिवारों को जिन हकीकतों का सामना करना पड़ता है, उन्हें भी संवेदनशीलता से ध्यान में रखा गया है। हर जवाब सावधानी से तैयार की गई जानकारी पर आधारित है, जिसे इकट्ठा करते समय पूर्वग्रह, जेंडर और सत्ता के रिश्तों का भी खास ख्याल रखा गया है। डिजिटल एक्सेस और साक्षरता के अलग-अलग स्तर पर मौजूद बड़ों के लिए भी इसे इस्तेमाल करना आसान हो, ऐसी इसकी डिजाइन है। यह सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि जरूरत पड़ने पर परिवारों को उनके इलाके में मिलने वाली मदद और शिकायत दर्ज करने के सही तरीकों से भी जोड़ा जाता है, ताकि बड़ों को सिर्फ जानकारी ही नहीं बल्कि सामने आ रही परिस्थिति को समझने और सही कदम उठाने में मदद मिले।
कैपजेमिनी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और सीएसआर हेड कुमार अनुराग प्रताप ने कहा, "बच्चे ऑनलाइन ज्यादा वक्त बिता रहे हैं, इसलिए टेक्नोलॉजी के साथ नए मौकों के साथ-साथ नए तरह के खतरे भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में ऐसी घटनाएं रोकना और संभावित खतरों को जल्दी पहचानकर सही कदम उठाना ज्यादा जरूरी हो गया है। पैरेंट्स और केयरगिवर्स पहले से इस्तेमाल कर रहे प्लेटफॉर्म के जरिए ही बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी और साधन आसानी से देने के लिए 'खुली बात' में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।"
मिसिंग लिंक ट्रस्ट के मिसिंग अवेयरनेस एंड स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम (एमएएसएसपी) के अगले चरण के तौर पर 'खुली बात' की शुरुआत की गई है। इस प्रोग्राम के जरिए किशोर लड़के-लड़कियों को बच्चों पर होने वाले यौन शोषण, ऑनलाइन सेफ्टी, पर्सनल सीमाएं, भरोसा जीतकर गलत फायदा उठाने के तरीके, शोषण के बारे में बताना और मदद मांगना, इन सब पर जरूरी जानकारी और स्किल्स दी जाती हैं। एमएलटी का मकसद 'खुली बात' के जरिए इस सिस्टम को मजबूत करना और सेफ्टी एजुकेशन, खुलकर बातचीत और जरूरत पड़ने पर जल्दी मदद मांगना, इन बातों को बचपन की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना है।