ASCI ने जाहिरातों में भरोसा बनाए रखने के लिए विजन 2032 लॉन्च किया
एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने AI युग में जाहिरातों की विश्वसनीयता बचाने के लिए तीन नए सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने का प्लान रखा है।
एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया यानी ASCI ने अपनी 40वीं सालाना आम सभा (AGM) में विजन 2032 का ऐलान किया है। इसमें भारत में जाहिरातों से जुड़ी व्यवस्था में भरोसे का ढांचा खड़ा करने पर जोर देते हुए 2027 से 2032 तक का डेवलपमेंट प्लान रखा गया है।
ASCI का कहना है कि जाहिरातों की समीक्षा के लिए मिलने वाला समय लगातार कम होता जा रहा है, निगरानी के तरीके अलग-अलग मीडियम की वजह से बदल रहे हैं, और कंटेंट क्रिएटर्स भी नियमन के पुराने ढांचे से आगे निकल चुके हैं। ऐसे में पारंपरिक सेफगार्ड्स इस रफ्तार के साथ चलने में पीछे रह रहे हैं। कंपनी का मानना है कि अब भरोसे की रक्षा करना, उसे साफ-साफ समझाना और उसे बड़े पैमाने पर टिकाए रखना ही सबसे जरूरी काम रह गया है। ब्रांड्स के सामने आने वाले खतरे असल में भरोसे से जुड़ी बड़ी समस्या का ही हिस्सा हैं, जहां कई बार गलत मंशा वाले लोग असली बातचीत पर कब्जा कर लेते हैं, तो दूसरी तरफ ग्राहक सबूत और ठोस स्पष्टीकरण मांगते हैं। जाहिरातें अब पब्लिक हेल्थ, ऑनलाइन सेफ्टी और बच्चों की सेहत जैसे बड़े सामाजिक मुद्दों में भी घसीटी जा रही हैं।
विजन 2032 मानता है कि जाहिरात इंडस्ट्री के लिए यह बड़े बदलाव का दौर है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ पर्सनलाइज्ड कम्युनिकेशन, रिटेल मीडिया और नए डिजिटल फॉर्मेट भी शामिल हैं। पारंपरिक सेल्फ-रेगुलेशन ASCI के काम का केंद्र बना रहेगा, लेकिन संस्था पॉलिसी, रिसर्च, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की क्षमता बढ़ाने के जरिए अपनी भूमिका को और बड़ा करना चाहती है।
इस प्लान के तहत ASCI तीन सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने वाला है। पहला, ASCI लीगल एंड पॉलिसी फोरम, इंडस्ट्री, कानून के जानकारों, रेगुलेटर्स, शिक्षाविदों और ग्राहकों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर रेगुलेटरी क्लैरिटी और पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर बात करेगा, साथ ही रिसर्च, पॉलिसी डिस्कशन और इंडस्ट्री ट्रेनिंग को भी सपोर्ट देगा। दूसरा, ASCI सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल इनोवेशन इन AI इन एडवर्टाइजिंग, क्रिएटिव डेवलपमेंट, टारगेटिंग, पर्सनलाइजेशन, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और कंज्यूमर एंगेजमेंट में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर फोकस करेगा, और सिंथेटिक मीडिया, AI से बने दावों तथा ऑटोमेटेड डिसिजन-मेकिंग जैसे मुद्दों पर गाइडेंस और रिसर्च तैयार करेगा। तीसरा, ASCI सेंटर फॉर क्रिएटर एक्सीलेंस एंड ट्रस्ट, तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोसिस्टम के साथ जुड़कर प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स, ट्रेनिंग, क्रिएटर सर्टिफिकेशन, डिस्क्लोजर और कंप्लायंस पर काम करेगा।
इन पहलों की अगुवाई के लिए बोर्ड ने मौजूदा चेयरमैन सुधांशु वत्स को दोबारा एक और कार्यकाल के लिए चुना है। एस सुब्रमण्येश्वर वाइस-चेयरमैन बने रहेंगे, जबकि परितोष जोशी ऑनरेरी ट्रेजरर के पद पर बने रहेंगे।
इस मौके पर ASCI चेयरमैन सुधांशु वत्स ने कहा, "भारत में जाहिरात इंडस्ट्री जिस रफ्तार से बदल रही है, उसे देखते हुए हमारे सामने बड़ी रेगुलेटरी चुनौतियां हैं। AI, क्रिएटर्स, अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स और पर्सनलाइजेशन, ब्रांड्स के दर्शकों तक पहुंचने के तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं। मेरा सबसे बड़ा फोकस यह सुनिश्चित करना है कि ASCI का विजन 2032 असल में सच हो। आने वाले महीनों में जो तीन सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस हम बनाना चाहते हैं, वे ASCI के सफर में एक बड़ा कदम हैं। बोर्ड इस बात पर जोर दे रहा है कि जिस रफ्तार से ASCI इंडस्ट्री को रेगुलेट कर रहा है, उसी रफ्तार से संस्था की अपनी क्षमताएं भी बढ़ें।"
वाइस-चेयरमैन एस सुब्रमण्येश्वर ने कहा, "आज की जाहिरात इंडस्ट्री में पहले से कहीं ज्यादा लोग शामिल हैं, और विजन 2032 इन सबको साथ लेकर चलने का भरोसा देता है। हमने जो सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने का सोचा है, वे जाहिरात इंडस्ट्री के पारंपरिक हिस्सों से आगे बढ़कर कई स्टेकहोल्डर्स की व्यापक भागीदारी के लिए रास्ता खोलते हैं, और ऐसा होना जरूरी भी है। इससे भरोसा मिलता है कि जाहिरातों की बढ़ती हुई यह इकोसिस्टम सेल्फ-रेगुलेशन के तरीकों से असरदार ढंग से जुड़ी रहेगी और इकोसिस्टम के विकास में अहम योगदान देगी।"
ASCI अकादमी ट्रेनिंग, कंज्यूमर एजुकेशन और थॉट लीडरशिप पर काम करती रहेगी, जिसमें आगे के प्लान के तौर पर ट्रस्ट इन एडवर्टाइजिंग इंडेक्स, इंडस्ट्री और स्टूडेंट्स के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम, रिसर्च पार्टनरशिप, कंज्यूमर एजुकेशन इनिशिएटिव्स और ASCI एडट्रस्ट IP शामिल होंगे।
ASCI की मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था ग्राहकों की शिकायतों की जांच करती रहेगी, साथ ही प्रायोरिटी कैटेगरी, जाहिरातों के नए फॉर्मेट और खामियों पर खुद से नजर रखने वाले सुओ मोटो डिपार्टमेंट को भी और मजबूत बनाएगी। अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए ASCI का कंप्लेंट डिपार्टमेंट अलग-अलग AI टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने के विकल्प भी परख रहा है।
विजन 2032 के जरिए ASCI का मकसद जाहिरातों में भरोसे को अपने लंबे समय के एजेंडे के केंद्र में रखते हुए सेल्फ-रेगुलेशन के अपने अधिकार को बढ़ाना है, साथ ही पॉलिसी, रिसर्च, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और इकोसिस्टम की भागीदारी में अपनी भूमिका को और पुख्ता करना है।