अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में हलचल, दस साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यिल्ड 2007 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के पार
अमेरिका और ईरान के बीच जंग जैसे हालात के बीच बढ़ती तेल की कीमतों का असर अब अमेरिका के बॉन्ड मार्केट पर भी दिखने लगा है। अमेरिका के दस साल के सरकारी बॉन्ड की यिल्ड 5 प्रतिशत के पार निकल गई है, और यह लेवल 2007 के ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस के बाद सबसे ऊंचा है।
मार्केट में इन्वेस्टर्स का अंदाजा है कि बढ़ती महंगाई के दबाव में फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ा सकता है।
मिडल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इससे तेल के दाम फिर बढ़ रहे हैं और अमेरिका की इकॉनमी के सामने महंगाई की नई चुनौती खड़ी हो गई है। तेल के दाम बढ़ने पर पेट्रोल, डीजल, ट्रांसपोर्ट और प्रोडक्शन कॉस्ट पर सीधा असर पड़ता है।
इसका सीधा असर ग्राहकों के खर्च और कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ सकता है। इसी वजह से महंगाई और बढ़ने का डर इन्वेस्टर्स को सता रहा है। इसी टेंशन की वजह से बॉन्ड मार्केट में बड़े पैमाने पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।
अमेरिका के दस साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यिल्ड मंगलवार को 5.02 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके बाद यह 5.04 प्रतिशत के आसपास भी गई। 2007 के बाद पहली बार इतनी ऊंची लेवल देखने को मिली है। बॉन्ड यिल्ड बढ़ने का मतलब है सरकार के लिए कर्ज लेने का खर्च बढ़ना। इसका असर आगे चलकर कंपनियों के कर्ज और ग्राहकों के लोन के खर्च पर भी पड़ सकता है। इस वजह से अमेरिका की इकॉनमी पर बढ़ते ब्याज दर का दबाव बनने की आशंका है।
तेल के बढ़ते दाम और महंगाई के दबाव की वजह से फेडरल रिजर्व के सामने बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। मार्केट के ट्रेड से यह संकेत मिल रहा है कि फेड ब्याज दर बढ़ा सकता है। ब्याज दर बढ़ने से महंगाई कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, लेकिन साथ ही कर्ज महंगा होकर इकोनॉमिक ग्रोथ पर दबाव आ सकता है। इसी वजह से फेड का आने वाला फैसला सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के मार्केट के लिए भी अहम माना जा रहा है। अमेरिका के बॉन्ड यिल्ड में यह बढ़ोतरी शेयर बाजार, डॉलर और दूसरे देशों के कर्ज बाजार पर भी असर डाल सकती है।