अक्षया नाईक ने गणेशोत्सव में मालवणी की रेड लाइट एरिया के बच्चों के लिए किया क्लाउनिंग परफॉर्मेंस
'Clowns Without Borders India' के जरिए एक्ट्रेस ने मालाड के मालवणी इलाके में तीन गणपति मंडलों में जाकर बच्चों का मनोरंजन किया, भारी बारिश के बावजूद प्रयोग नहीं रोका।
सीरियल, ओटीटी और थिएटर से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस अक्षया नाईक इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं, वो है उनका क्लाउनिंग। इस बार का गणेशोत्सव अक्षया के लिए खास रहा क्योंकि उन्होंने अपनी कला के जरिए बाप्पा की सेवा करते हुए मालाड के मालवणी इलाके की रेड लाइट एरिया में रहने वाले बच्चों के लिए क्लाउनिंग के प्रयोग किए।
अक्षया 'Clowns Without Borders India' नाम की संस्था से जुड़ी हैं, जो सेक्स वर्कर्स के बच्चों, रेड लाइट एरिया में रहने वाले बच्चों और अलग-अलग वंचित तबकों तक नाटक और क्लाउनिंग पहुंचाने का काम करती है। इस पहल का मकसद है कि बच्चों को कुछ समय के लिए उनके हालात से दूर ले जाकर उनसे संवाद किया जाए और कला के जरिए उन्हें खुशी के पल दिए जाएं।
इस साल गणेशोत्सव के दौरान संस्था ने मालवणी, मालाड की रेड लाइट एरिया में काम करने वाली एनजीओ 'आस्था परिवार' के साथ मिलकर काम किया। इसके बाद इलाके के तीन गणपति मंडलों में जाकर बच्चों के लिए क्लाउनिंग के शो किए गए।
अक्षया बताती हैं कि गणेशोत्सव के समय कई कलाकार गणपति मंडलों में अपनी कला को 'सेवा' के तौर पर पेश करते हैं। यह देखकर अक्सर उनके मन में सवाल उठता था कि क्लासिकल डांस या म्यूजिक न सीखे होने पर अपनी कला को बाप्पा की सेवा में कैसे लगाया जाए। इस बार उन्हें इसका जवाब मिल गया। अक्षया मानती हैं कि लोगों को हंसाना भी एक बड़ी सेवा है, और बाप्पा के मंडप में खड़े होकर अपना क्लाउनिंग परफॉर्मेंस देने से बड़ी खुशी उनके लिए कुछ और नहीं थी। इस पूरे अनुभव का श्रेय उन्होंने अपने डायरेक्टर रूपेश टिल्लू और साथी क्लाउन अंकिता निकरड को दिया।
अक्षया ने इस दौरान की एक और खास बात शेयर की। जिस इलाके में यह प्रयोग हुए, वो मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय का इलाका है, लेकिन जहां शो हुआ वहां मस्जिद के ठीक सामने गणपति का मंडप लगा था। 'आस्था परिवार' के साथ काम करने वाली कुछ बुर्का पहने महिला वॉलंटियर और टीचर भी बच्चों को लेकर गणपति के मंडप में पहुंची थीं। इन बच्चों में अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमियों के बच्चे शामिल थे, लेकिन उस पल सब मिलकर इस खुशी का हिस्सा बने। अक्षया के मुताबिक, धर्म और पहचान को अलग रखकर लोगों का एक-दूसरे की खुशी में शामिल होना, ऐसे कई छोटे-छोटे पल हमारे आसपास होते रहते हैं। उनका मानना है कि लोगों को साथ लाने की ताकत ही कला और परफॉर्मेंस की असली शक्ति है।
क्लाउनिंग के इन प्रयोगों के बीच अक्षया और उनके साथियों के सामने एक और चुनौती आई। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश की आवाज इतनी तेज थी कि एक-दूसरे की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी, और वहां माइक की सुविधा भी नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने शो रोका नहीं और बच्चों के लिए लगातार तीन प्रयोग पेश किए।
शो खत्म करके घर लौटते वक्त शरीर थक गया था, लेकिन मन में एक अलग ही ऊर्जा थी, ऐसा अक्षया बताती हैं। इस अनुभव ने उन्हें फिर एहसास कराया कि कला सिर्फ स्टेज पर पेश करने के लिए नहीं होती। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना, अलग-अलग समुदायों को पास लाना और किसी की जिंदगी में कुछ पलों की खुशी लाना, इसके लिए भी कला का इस्तेमाल हो सकता है। अक्षया नाईक ने कहा कि इस साल के गणेशोत्सव में अपनी कला के जरिए बाप्पा के चरणों में सेवा कर पाना, उनके लिए सबसे सुंदर बात रही।