अजय देवगण के जुहू बंगले पर सैलून-स्पा के काम को लेकर विवाद, BMC ने भेजी स्टॉप वर्क नोटिस
जुहू की कपोल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में अजय देवगण के बंगले में सैलून और स्पा बनाने का काम विवादों में घिर गया है। सोसाइटी की शिकायत पर BMC के के-वेस्ट वॉर्ड ने काम रोकने का नोटिस भेजा है, जबकि देवगण कुटुंब का कहना है कि सारी परमिशन ली गई थीं।
बॉलिवूड एक्टर अजय देवगण इन दिनों अपनी जुहू वाली प्रॉपर्टी को लेकर चर्चा में हैं। मामला जुहू की कपोल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी का है, जहां देवगण के बंगले में सैलून और स्पा बनाने का काम चल रहा था। इसी काम पर सोसाइटी ने आपत्ति जताई, जिसके बाद बीएमसी के के-वेस्ट वॉर्ड ने इस प्रॉपर्टी को स्टॉप वर्क नोटिस भेज दी।
मिली जानकारी के मुताबिक, के-वेस्ट वॉर्ड ने साफ किया है कि इस जगह के कमर्शियल इस्तेमाल के लिए कोई परमिशन नहीं दी गई थी। पहले भी इस मामले में जरूरी कागजात मांगे गए थे, लेकिन कागजात जमा न होने पर काम रोकने की नोटिस जारी करनी पड़ी, ऐसा पालिका अफसरों ने बताया।
दरअसल अजय देवगण ने कपोल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में अपनी एक प्रॉपर्टी किराए पर दी थी। जब पता चला कि इस जगह पर सैलून और स्पा बनाया जा रहा है, तो सोसाइटी के लोगों को दिक्कत हुई। सोसाइटी ने देवगण फैमिली को चिट्ठी लिखकर वो कागजात मांगे जो साबित करें कि इस जगह का कमर्शियल इस्तेमाल कानूनी तौर पर हो सकता है। सोसाइटी का कहना है कि इस चिट्ठी का देवगण फैमिली की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
के-वेस्ट वॉर्ड के एक अफसर ने बताया कि इस इलाके के कमर्शियल इस्तेमाल के लिए पालिका ने कोई परमिशन नहीं दी है। सोसाइटी की शिकायत मिलने के बाद मालिकों से कागजात मांगे गए थे, लेकिन कागजात जमा न होने पर स्टॉप वर्क नोटिस भेजी गई।
वहीं देवगण फैमिली की तरफ से इस मामले में अपना पक्ष रखा गया है। उनका दावा है कि जरूरी सारी परमिशन और मंजूरी संबंधित अफसरों से बाकायदा ली गई थीं। अजय देवगण की टीम में चीफ लीगल एंड कंप्लायंस ऑफिसर रुचि कनोजिया ने बताया कि जगह के प्रस्तावित इस्तेमाल के लिए जरूरी परमिशन और मंजूरी संबंधित अफसरों से बाकायदा ली गई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, देवगण फैमिली ने इस मामले में जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त मांगा है। यह मामला अब कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट तक भी पहुंच चुका है, और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
इस पूरे मामले में सोसाइटी की मुख्य आपत्ति प्रॉपर्टी किराए पर देने को लेकर नहीं है, बल्कि रेसिडेंशियल सोसाइटी में प्रॉपर्टी के कमर्शियल इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है। सोसाइटी का कहना है कि उनकी सोसाइटी पूरी तरह रेसिडेंशियल है, और सिविक व लीगल परमिशन के अलावा यह सवाल भी है कि क्या इस बंगले का कमर्शियल मकसद से इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिलहाल बीएमसी की नोटिस, सोसाइटी की शिकायत और देवगण फैमिली की तरफ से दी गई परमिशन की जानकारी की वजह से यह मामला चर्चा में है। आगे की कार्रवाई में जरूरी कागजात और परमिशन के आधार पर इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है, यह देखना बाकी है।