मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:51 IST

आंगन में दिखने वाली चिड़िया अब गायब, भारत की 60% पक्षी प्रजातियां घट रहीं

स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स रिपोर्ट में 348 पक्षी प्रजातियों पर हुए अध्ययन में लंबे समय से गिरावट दर्ज की गई है।

आंगन में दिखने वाली चिड़िया अब गायब, भारत की 60% पक्षी प्रजातियां घट रहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कुछ दशक पहले तक घर के आंगन में, खेत की मेड़ पर या पेड़ों की डालियों पर आसानी से दिख जाने वाली कई चिड़िया अब नई पीढ़ी के लिए लगभग अनजान होती जा रही हैं। स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 348 पक्षी प्रजातियों पर हुए अध्ययन में 60 फीसदी पक्षियों की संख्या में लंबे समय से गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट कहती है कि दुर्लभ पक्षियों से ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिन पक्षियों को पहले आम माना जाता था, उनकी संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। कई पक्षियों की तादाद अचानक नहीं घटी है, बल्कि इतनी धीमी रफ्तार से घट रही है कि इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

जो चिड़िया दशकों पहले तक रोज के आस-पास का हिस्सा हुआ करती थीं, आज के बच्चे उन्हें देख ही नहीं पाते। यह गिरावट सिर्फ किसी दुर्लभ प्रजाति तक सीमित नहीं है। घर की गौरैया, मैना, सारिका, दयाल, उल्लू और बाकी आम पक्षियों के रहने की जगह पर भी शहरीकरण का असर पड़ रहा है। इस अध्ययन में देश की 942 पक्षी प्रजातियों का विश्लेषण किया गया, जिसके लिए देशभर के पक्षी-प्रेमियों की करीब 4.8 करोड़ निरीक्षण रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया।

पक्षियों की संख्या घटने के पीछे कई वजहें सामने आई हैं, जैसे पेड़ों और प्राकृतिक रहवासों का लगातार कम होना, बढ़ता शहरीकरण, खेती के तरीकों में बदलाव, कीटनाशकों का इस्तेमाल, प्रदूषण और इंसानी दखल। इंसानी दखल का एक और अनजाना असर भी सामने आया है। उत्तराखंड में हिमालयन मोनाल पक्षी पर हुई एक स्टडी में पाया गया कि जिन इलाकों में इंसानों की वजह से शोर बढ़ गया है, वहां के पक्षी अपनी आवाज दूसरों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा तेज बोलने लगे हैं।

सबसे ज्यादा खतरे में गिद्ध, शिकारी पक्षी, समुद्र किनारे आने वाले प्रवासी पक्षी और बत्तखें हैं, इनकी संख्या में बड़ी गिरावट देखी गई है। घास के मैदानों में रहने वाले पक्षियों की संख्या भी तेजी से घटी है। लंबी दूरी तक प्रवास करने वाले पक्षियों की तादाद में 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है, वहीं किनारे वाले इलाकों में आने वाले कुछ प्रवासी पक्षी समूहों में करीब 80 फीसदी तक की कमी दर्ज हुई है।

हालांकि सभी पक्षियों की हालत खराब नहीं है। मोर, एशियाई कोयल, धूसर कबूतर और धूसर वटवट्या जैसी कुछ जानी-पहचानी चिड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी या स्थिरता भी देखने को मिली है। मतलब यह कि सारे पक्षी कम नहीं हो रहे, लेकिन पक्षियों के बड़े समूह में जो लंबे समय से गिरावट चल रही है, वह चिंता की बात जरूर है।

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