मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:47 IST

आंबेगाव के किसान बोले: वादे नहीं, सीधी मदद चाहिए; सूखे की सूची से तालुका बाहर

आंबेगाव तालुका के किसान करपी फसल और खाली होते अनाज के बीच दशहरा-दिवाली की चिंता में हैं। सरकार की दुष्काल सूची में तालुका शामिल नहीं है।

आंबेगाव के किसान बोले: वादे नहीं, सीधी मदद चाहिए; सूखे की सूची से तालुका बाहर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

खेत में जली हुई फसल और घर में खाली होता अनाज का कोठार, आंबेगाव तालुका के कई परिवारों का यही हाल है। दशहरा-दिवाली के त्योहार के लिए पैसा कहां से आएगा, यह सवाल किसानों को परेशान कर रहा है। बच्चों की पढ़ाई, घर में किसी की बीमारी और रोज की जरूरतें पूरी करते-करते किसानों की हालत खराब हो रही है। सूखे की वजह से बेजुबान जानवरों के चारे का सवाल भी गंभीर होता जा रहा है।

सरकार ने सूखा घोषित किया है, लेकिन आंबेगाव तालुका को उससे बाहर रखा गया है। इससे किसानों की हालत और बिगड़ गई है। सरकार ने राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया, मगर आंबेगाव उसमें नहीं है।

त्योहार बिल्कुल पास आ गया है। बाजारों में रौनक शुरू हो चुकी है। घर-घर में साफ-सफाई, खरीदारी और पकवानों की तैयारी चल रही है। लेकिन सूखे की मार झेल रहे किसानों के घर में खुशी की जगह चिंता का साया है। बारिश न होने से खेत में खड़ी फसल जल गई। उपज हाथ से चली गई, फसल पर किया गया खर्च बेकार हो गया और अब घर का गुजारा कैसे चलेगा, यह सवाल तालुका के किसानों के सामने खड़ा है।

आंबेगाव तालुका के लिए वरदान माना जाने वाला डिंभे बांध पूरी क्षमता से भरा है। लेकिन इस बांध का पानी आंबेगाव, शिरूर और जुन्नर तालुकों के साथ श्रीगोंदा और नगर जैसे इलाकों को भी जाता है। दूसरे बांध पूरी क्षमता से नहीं भरे हैं, इसलिए इस साल डिंभे बांध का पानी जल्दी खत्म हो सकता है। ऐसे में किसानों के सामने पानी का भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

किसानों में यह भावना है कि उन्हें वादों से ज्यादा सीधी मदद की जरूरत है। बारिश की कमी, फसल के नुकसान और पानी की किल्लत को देखते हुए शासन ने सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों के लिए कई रियायतें और उपाय घोषित किए हैं। इनमें जमीन के राजस्व में छूट, कर्ज वालों के लिए स्थगन, बिजली बिल में रियायत, पानी की सप्लाई, चारा, रोजगार गारंटी और विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में छूट के प्रावधान शामिल हैं। मगर सवाल यही है कि इन फैसलों का असली फायदा किसानों के हाथ में कब पहुंचेगा, क्योंकि आज किसान को सच में पैसे की बड़ी तंगी महसूस हो रही है।

शिक्षा को लेकर भी मांग उठी है। आंबेगाव तालुका के सूखा प्रभावित इलाकों के विद्यार्थियों को पैसों की दिक्कत से पढ़ाई से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए शैक्षणिक वर्ष 2026-27 और 2027-28 की पूरी शैक्षणिक फीस सरकार माफ करे। स्कॉलरशिप मिलने में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सभी स्कॉलरशिप योजनाओं के लिए एक ही सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की जाए। साथ ही कमवा और शिका योजना से विद्यार्थियों को ठोस आर्थिक मदद मिले, ताकि वे अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकें।

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