७ अक्टूबर की GST परिषद बैठक में सोने-चांदी के आयात पर IGST छूट पर चर्चा की चर्चा
७ अक्टूबर की GST परिषद बैठक में सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और नियुक्त संस्थाओं को मिली IGST छूट पर चर्चा की बात कही जा रही है।
सोने और चांदी के दामों में इन दिनों काफी हलचल दिख रही है। इसकी वजह ग्लोबल बाजार की चाल बताई जा रही है। आने वाले कुछ दिनों में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक अहम कारण ७ अक्टूबर को होने वाली GST परिषद की बैठक है। कहा जा रहा है कि इस बैठक में बैंकों और सरकार की तय की हुई संस्थाओं को सोने, चांदी और प्लैटिनम पर मिलने वाली छूट को लेकर बड़ी चर्चा हो सकती है।
बताया जा रहा है कि बैठक में आयात पर मिलने वाली IGST की छूट खत्म करने के प्रस्ताव पर बात होगी। अभी इन धातुओं के आयात पर 3% IGST लगता है, लेकिन कुछ बैंकों और नियुक्त संस्थाओं को इससे छूट मिली हुई है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो गया, तो इन संस्थाओं को भी आयात पर 3% GST भरना पड़ेगा। इसका मतलब यह नहीं कि अगले ही दिन से दुकानों में सोने और चांदी के दाम ३ टक्के बढ़ जाएंगे। हां, कुछ हद तक असर जरूर दिखेगा।
मौजूदा नियम के मुताबिक सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर ३% GST लगता है। सरकार की तय की हुई बैंकों और नियुक्त संस्थाओं को इस टैक्स से छूट दी गई है। यह छूट २०१७ में दी गई थी, जब कीमती धातुओं का आयात और कारोबार ज्यादा नियमों वाले सिस्टम के तहत हो रहा था। अब सरकार इस सिस्टम को बदलने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव का एक मकसद बैंकों, नियुक्त संस्थाओं और सराफा बाजारों के लिए एक जैसी टैक्स व्यवस्था पक्की करना है। यानी कारोबार का रास्ता अलग-अलग हो, फिर भी टैक्स में ज्यादा एकरूपता आ सके।
छूट हटाने की तैयारी के पीछे एक बड़ी वजह सोने और चांदी के आयात से देश के बाहर जाने वाला विदेशी मुद्रा भंडार बताया गया है। भारत में सोने की मांग बहुत है और उसका बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अगस्त २०२६ के बीच भारत का सोने का आयात ३.३८ टक्के बढ़कर १७.४७ अरब डॉलर हो गया। इसी दौरान चांदी का आयात ८.८१ टक्के घटकर १.७४ अरब डॉलर रहा। रुपये पर दबाव के बीच सरकार कीमती धातुओं के आयात पर बारीकी से नजर रख रही है। ज्यादा आयात से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है।
अगर IGST की छूट रद्द हुई, तो आयात करने वाले बैंकों और नियुक्त एजेंसियों का खर्च बढ़ सकता है। लंबे समय में इसका कुछ असर सप्लाई चेन और कीमतों पर हो सकता है। लेकिन सोने के दाम सिर्फ ३ टक्के बढ़ने की संभावना कम है। सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर-रुपये के विनिमय दर, आयात शुल्क, देश की मांग और बाजार के हालात जैसी कई चीजों पर टिकी होती है। इसलिए प्रस्ताव को मंजूरी मिल भी जाए, तो बाजार पर उसका असर कितना और कितनी तेजी से होगा, यह इन सभी बातों पर निर्भर करेगा।
सोने-चांदी का आयात घटाने के लिए सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है। मई २०२६ में सोने-चांदी पर आयात शुल्क ६ टक्के से बढ़ाकर १५ टक्के कर दिया गया, जबकि प्लैटिनम पर शुल्क ६.४ टक्के से बढ़ाकर १५.४ टक्के किया गया।