31 साल बाद हरतालिका और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, जानिए व्रत और पूजा का सही समय
इस बार हरतालिका और गणेश चतुर्थी दोनों 14 सितंबर को पड़ रहे हैं, ऐसे में महिलाओं के मन में व्रत और पूजा को लेकर कई सवाल हैं।
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इस साल हरतालिका और गणेश चतुर्थी दोनों सोमवार, 14 सितंबर को एक ही दिन पड़ रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि ऐसा दुर्लभ योग 31 साल बाद बन रहा है। आमतौर पर गणेश चतुर्थी हरतालिका के अगले दिन आती है, लेकिन इस बार दोनों त्योहार एक साथ आने से बहुत सी महिलाओं के मन में व्रत और पूजा कब करें, इसे लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है।
हरतालिका और गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के दो अहम त्योहार माने जाते हैं। हरतालिका के दिन शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना से यह व्रत करती हैं। दूसरी तरफ गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर में गणपति बप्पा का आगमन होता है।
पंचांग के हिसाब से 14 सितंबर की सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। सूर्योदय के वक्त तृतीया तिथि होने की वजह से हरतालिका का व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। और चूंकि इसी दिन सुबह चतुर्थी तिथि भी शुरू हो रही है, इसलिए गणेश चतुर्थी भी उसी दिन मनाई जाएगी।
महाराष्ट्र के पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। मुंबई के लिए हरतालिका पूजा का सुबह का मुहूर्त करीब 6:26 से 7:06 बजे तक बताया गया है। जो महिलाएं हरतालिका का व्रत रखती हैं, उन्हें 14 सितंबर को ही व्रत रखना चाहिए। सुबह नहाकर संकल्प लेने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। यह व्रत श्रद्धा के मुताबिक निर्जला या फलाहार, दोनों तरीकों से किया जाता है।
दोनों त्योहार एक ही दिन होने की वजह से पहले सुबह हरतालिका की पूजा करना सही माना जाता है, उसके बाद गणेश चतुर्थी की पूजा और गणपति की स्थापना करनी चाहिए। गणेश चतुर्थी की पूजा आमतौर पर दोपहर से पहले के शुभ मुहूर्त में की जाती है, और इस साल यह पूजा भी 14 सितंबर को ही होगी।
चूंकि इस बार हरतालिका व्रत और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रहे हैं, इसलिए व्रत उसी दिन खोलने की बजाय मंगलवार, 15 सितंबर को सुबह हरतालिका की उत्तरपूजा करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा बताई जा रही है। उत्तरपूजा के बाद देवी को भोग लगाकर पानी या तीर्थ लेकर व्रत खोलना चाहिए, उसके बाद हल्का सात्विक खाना लेना चाहिए। जिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा हो, उन्हें एकदम से भारी खाना नहीं खाना चाहिए, पहले पानी या तीर्थ लें, फिर दूध, फल, खीर या हल्का व्रत का खाना लें। सेहत की वजह से जो महिलाएं निर्जला व्रत नहीं रख पातीं, वे अपनी सुविधा के हिसाब से व्रत का तरीका तय कर सकती हैं।
हरतालिका व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। सुहाग, पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं श्रद्धा से यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसी वजह से अखंड सौभाग्य के प्रतीक के तौर पर हरतालिका व्रत का खास महत्व माना जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करके मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की जाती है, और कुंवारी लड़कियां भी मनपसंद जीवनसाथी पाने की चाह से यह व्रत रखती हैं। इलाके और परिवार की परंपरा के हिसाब से पूजा-विधि में थोड़ा-बहुत फर्क हो सकता है।