गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:48 IST

12वीं के बाद ये 5 कोर्स चुनने से पहले सौ बार सोच लें, पैसा और टाइम दोनों बर्बाद हो सकते हैं

करियर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई पुराने कोर्स अब जॉब मार्केट की डिमांड से मेल नहीं खाते, ऐसे में एडमिशन लेने से पहले सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी है।

12वीं के बाद ये 5 कोर्स चुनने से पहले सौ बार सोच लें, पैसा और टाइम दोनों बर्बाद हो सकते हैं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

12वीं पास करने के बाद सही कोर्स चुनना कोई आसान काम नहीं होता। कॉलेजों की चमकदार ब्रोशर और बड़े-बड़े विज्ञापन अक्सर कोर्स की ऐसी लुभावनी तस्वीर पेश करते हैं कि स्टूडेंट्स बिना सोचे-समझे एडमिशन ले लेते हैं। लेकिन असली सच्चाई डिग्री मिलने के बाद ही पता चलती है, जब हाथ में नौकरी नहीं होती। आज के दौर में सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उस डिग्री की मार्केट में कितनी डिमांड है। कई पुराने कोर्स आज के जॉब मार्केट की जरूरतों से बहुत पीछे रह गए हैं।

कोई भी कोर्स करने में लाखों रुपये और जिंदगी के कीमती साल खर्च होते हैं। ऐसे में अगर यह टाइम और पैसा बेकार चला जाए तो कोई भी निराश हो सकता है। करियर को सही दिशा देने के लिए उन कोर्सों से दूर रहना ही सही है जिनकी मार्केट वैल्यू अब लगभग खत्म हो चुकी है। यहां 5 ऐसे पॉपुलर लेकिन अब पुराने पड़ चुके कोर्सों के बारे में बताया गया है, जिनमें एडमिशन लेने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।

पहला है बिना किसी स्पेशलाइजेशन के सामान्य बीए। आज भी देश का बड़ा तबका बिना किसी खास स्किल के जनरल बीए कोर्स में एडमिशन ले लेता है। सिर्फ थ्योरी पढ़ने और पुरानी किताबें रटने से आज के कॉरपोरेट सेक्टर में कोई नौकरी नहीं मिलती। अगर इस डिग्री के साथ डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिसिस या कंटेंट राइटिंग जैसी स्किल्स नहीं जोड़ी जाएं, तो यह सिर्फ कागज का एक टुकड़ा बनकर रह जाती है।

दूसरा है एडवांस स्किल्स के बिना बेसिक बीकॉम। कॉमर्स स्टूडेंट्स में बीकॉम का क्रेज हमेशा से रहा है, लेकिन आज के ऑटोमेटेड और एआई के जमाने में सिर्फ बेसिक बीकॉम डिग्री पर अकाउंटेंट की नौकरी मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। जब तक स्टूडेंट सीए, सीएस, सीएफए या टैक्सेशन और फाइनेंशियल मॉडलिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स या शॉर्ट-टर्म सर्टिफाइड स्किल्स नहीं सीखते, तब तक सिर्फ इस डिग्री पर निर्भर रहना करियर के लिए खतरनाक हो सकता है।

तीसरा है भारी-भरकम फीस वाला डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट। टीवी और फिल्मों की चकाचौंध देखकर कई युवा इवेंट मैनेजमेंट का डिप्लोमा कोर्स चुन लेते हैं। इन कोर्सों की फीस बहुत ज्यादा होती है, लेकिन इस इंडस्ट्री में डिग्री से ज्यादा आपके कॉन्टैक्ट्स, एक्सपीरियंस और काम के दौरान आने वाले प्रेशर को हैंडल करने की काबिलियत मायने रखती है। बिना किसी प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस के सिर्फ कागजी डिप्लोमा के दम पर इस फील्ड में टिके रहना लगभग नामुमकिन है।

चौथा है बेसिक कंप्यूटर डिप्लोमा और ओ-लेवल कोर्स। एक जमाने में कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होना बड़ी बात मानी जाती थी, लेकिन आज के डिजिटल दौर में, जहां हर बच्चा स्मार्टफोन और कंप्यूटर चला लेता है, वहां सिर्फ बेसिक कंप्यूटर एप्लिकेशन या ओ-लेवल जैसे पुराने डिप्लोमा की वैल्यू नाममात्र रह गई है। कंपनियां अब बेसिक नॉलेज की बजाय कोडिंग, डेटा साइंस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसी एडवांस स्किल्स मांगती हैं।

पांचवां है डिजिटल और टेक स्किल्स के बिना मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता। मीडिया फील्ड का आकर्षण देखकर लाखों युवा इस सेक्टर में आते हैं। कई कॉलेज और संस्थान आज भी वही पुराना पारंपरिक सिलेबस पढ़ा रहे हैं, जो आज के डिजिटल मीडिया, एआई टूल्स और वीडियो एडिटिंग के दौर से मेल नहीं खाता। जब तक स्टूडेंट्स को मल्टीमीडिया, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और डेटा जर्नलिज्म की प्रैक्टिकल जानकारी नहीं होती, तब तक इस फील्ड में टिके रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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